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शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

सत्ता पक्ष यह न सोचे कि विधायकों व लोकतंत्र के अपमान को भूला दिया गया है

  • कोविड काल की त्रासदी झेल रही जनता के हित में विधानसभा सत्र में शामिल होने का निर्णय

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पटना 16 जुलाई, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल और माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करके कहा है कि भाजपा-जदयू और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष यह न समझें कि विगत बिहार विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों का जो अपमान हुआ था, उसे बिहार की जनता भूल गई है. उस अभूतपूर्व घटना ने बिहार को पूरी दुनिया में बदनाम किया था. सुशासन का दंभ भरने वाले नीतीश कुमार ने सारी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का गला घोंटकर ड्रैकोनियन पुलिस ऐक्ट पास करवाया था. जब पूरी दुनिया में सरकार की थू-थू हुई, तब उसने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही थी. यदि वह आगामी विधानसभा सत्र में विपक्ष के भाग लेने संबंधी निर्णय से यह नतीजा निकाल रही है कि हम उस अपमान को भूल चुके हैं, तो वह बड़ी गलतफहमी में है. उस अपमान को हम क्या पूरा बिहार कभी भी नहीं भूल सकता है. लोकतांत्रिक मूल्यों व संवैधानिक परंपराओं का तकाजा तो यह था कि सरकार व विधानसभा अध्यक्ष उस शर्मनाक घटना के लिए खेद व्यक्त करते. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है. बहरहाल, माले विधायक दल ने तय किया है कि सत्र के पहले दिन इसी विषय पर प्रतिवाद दर्ज किया जाएगा और सरकार व विधानसभा अध्यक्ष को उनके कभी न माफ हो सकने वाले गुनाहों की याद दिलाई जाएगी. यह सही है कि हमने माफी न मांगने तक विधानसभा सत्र के बहिष्कार की बात कही थी. लेकिन कोविड काल में आज बिहार की जनता जो त्रासदी झेल रही है, स्वास्थ्य व्यवस्था की जो नाकामी उजागर हुई है, कोविड से हुई मौतों को छिपाने की जो साजिशें चल रही हैं, मुआवजा देने से जो भागने की कोशिश हो रही है; ऐसी स्थिति में सरकार को खुली छूट नहीं दी जा सकती. चंूकि यह सत्र छोटा है, इसलिए हमारी पुरजोर कोशिश होगी कि कोविड के दौर में हुई मौतों के आंकड़ों को छिपाने की सरकारी साजिश को बेनकाब किया जाए औरतमाम मृतक परिजनों को 4 लाख रु. मुआवजा अविलंब प्रदान करने के लिए सरकार को बाध्य किया जाए.

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