पर्यावरण को बचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है : के एन गोविंदाचार्य - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

पर्यावरण को बचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है : के एन गोविंदाचार्य

 

  • पर्यावरणविद लेखक संजीव तिवारी की पुस्तक "विकास वर्सिस डेवलपमेंट " का हुआ विमोचन 

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नई दिल्ली। लेखक एवं ग्राम उदय फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष पर्यावरणविद संजीव तिवारी की पुस्तक "विकास वर्सिस डेवलपमेंट " का विमोचन आज होटल जीपीएस गैलेक्सी उत्तम नगर में सर्वोच्च न्यायालय के प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं समाजसेवी देवेंद्र शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक के.एन गोविंदाचार्य, दैनिक भास्कर के राजनीतिक संपादक के.पी मलिक, प्रसिद्ध पर्यावरण वैज्ञानिक श्याम सुंदर राठी, राष्ट्रीय सेवा योजना के संस्थापक सदस्य कृष्ण कुमार गुप्ता, सैफरन स्वार्ड्स की विख्यात लेखिका मनोषी सिन्हा,एन सी आर टी के पूर्व सलाहकार आचार्य डॉ. हर चरण लाल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अशोक कुमार निर्भय,तमिल एवं अंग्रेजी अनुवादक रामास्वामी अय्यर के कर कमलों द्वारा होटल जेपीएस गैलेक्सी में किया गया।  इस मौके  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक के.एन गोविंदाचार्य ने पुस्तक के लेखक संजीव तिवारी को शुभकामना और बधाई देते हुए कहा कि विषय बहुत अच्छा चुना है और हमने डेवलपमेंट यानि विकास के लिए प्रकृति का जो दोहन किया है उसको अभी नहीं संभाला तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ना ऑक्सीजन होगी और ना पीने के लिए जल होगा। आज लेखक ने इसी खतरे को शब्दो में व्यख्यायित किया है। हमको मिलकर पर्यावरण की रक्षा में काम करना होगा तभी हम अपने बच्चों को स्वस्थ जीवन दें सकेंगे और भविष्य सुरक्षित होगा। अपनी पुस्तक के विमोचन पर सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए लेखक संजीव तिवारी ने कहा कि आज पर्यावरण को बचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।  


हमारी धरती को पिछले 100 साल में जितना नुकसान पहुंचा है। उससे पहले शायद ही कभी इतना नुकसान हुआ हो। पृथ्वी का प्राकृतिक असंतुलन, पिघलते हिम शिखर, पृथ्वी और समुद्री जीवों पर मंडराते खतरे के काले बादल, बाढ़ और सूखे का बढ़ता प्रकोप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनेताओं को दिखाई ही नहीं दे रहा है। हम सभी गहरी नींद में हैं। हमारे पास अपनी जिम्मेदारी निभाने का बहुत कम समय बचा है। अगर हम अब भी नहीं जागे, तो कब जागेंगे ? अब भी समय रहते जागे तो भविष्य को संरक्षित कर पाएंगे। मेरी पुस्तक इन्ही विषयों पर ध्यान आकृष्ट करती है और इस पुस्तक को मैंने अपने गुरुदेव पुरी पीठ के शंकराचार्य परम पूज्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के श्रीचरणों के सप्रेम समर्पित किया है। इस मौके पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त समाजसेवी नेहा गुलिया,समाजसेवी दीपशिखा गुलिया, शोधकर्ता रिपुंजय ठाकुर,शोधकर्ता धर्मेंद्र जांगड़, सामाजिक कार्यकर्ता विवेक चौबे,सर्वज्ञ गुप्ता समेत शिक्षा,साहित्य,पर्यावरणविद,कला और पत्रकारिता जगत के प्रबुद्ध लोग उपस्थित रहे। 

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