बिहार : भक्तिमय वातावरण में महाछठ मनाने की तैयारी चरम पर - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 9 नवंबर 2021

बिहार : भक्तिमय वातावरण में महाछठ मनाने की तैयारी चरम पर

chhath-prepration
पटना. सोमवार को नहाय-खाय,मंगलवार को खरना पूजा,बुधवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य तथा गुरूवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महापर्व संपन्न होगा.चार दिवसीय सूर्योपासना के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर गंगा तटों पर विशेष व्यवस्था की गयी है.जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों द्वारा  छठ घाटों का निरंतर निरीक्षण किया जा रहा है. इस बीच पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर रजनी देवी के प्रतिनिधि समाजसेवी पप्पू राय के द्वारा घाटों का निरीक्षण किया गया.अपने क्षेत्रों के घाटों का निरीक्षण करने के बाद समाजसेवी पप्पू राय ने कहा कि सारी व्यवस्था पूर्ण कर ली गई है किसी प्रकार की कोई कठिनाई व्रतियों को नहीं होगी.


मालूम हो कि सोमवार को पहला दिन था.पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया गया. सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर उसे पवित्र बना लिया गया. इसके पश्चात छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत किये. घर के सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण किये . भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया गया. यह दाल चने की थी. आज छठ महापर्व का दूसरा दिन है. कार्तिक शुक्ल पंचमी को पड़ता है. इस दिन व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं. इसे ‘खरना’ कहा जाता है. खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के सभी लोगों को निमंत्रित भी किया जाता है. प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है. इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है. इस दौरान पूरे घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है. कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन छठ महापर्व का तीसरा दिन होता है. इस दिन सुबह के समय छठ का प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद के रूप में ठेकुआ, जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, के अलावा चावल के लड्डू बनाए जाते हैं. इसके अलावा चढ़ावे के रूप में लाया गया सांचा और फल भी छठ प्रसाद के रूप में शामिल होता है. शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूंप सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं. सभी छठ व्रती एक नीयत तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं. सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूंप से पूजा की जाती है. इस दौरान छठ घाटों पर कुछ घंटे के लिए मेले जैसा दृश्य बन जाता है. चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. व्रती, छठ घाट पर बनाए गए अपने बेदी पर पुनः पहुंचते हैं, जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था. जिसके बाद भोर में पुनः पिछले शाम की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है. अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं. छठ महापर्व के तीसरे दिन बुधवार को शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ दिया जायेगा. इस दिन छठ व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगी और शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ देंगी.


छठपूजा तिथि और मुहूर्त

10 नवंबर (संध्या अर्घ) सूर्योदय : सुबह 6:33 बजे, सूर्यास्त : शाम 5:27 बजे

11 नवंबर (सुबह अर्घ) सूर्योदय : सुबह 6:34 बजे, सूर्यास्त : शाम 5:26 बजे : गुरुवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ

चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन गुरुवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ देने के साथ होगा. अर्घ देने के बाद वर्ती घाट पर बैठ कर विधिवत तरीके से पूजा करेंगे. फिर आसपास के लोगों को प्रसाद दिया जायेगा.


छठ पूजा अर्घ्य मन्त्र समय

ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं.

अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् ..


इस बीच बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने छठ महापर्व के अवसर पर बिहार के लोगों और देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना एवं लोक आस्था से जुड़े ‘छठ पर्व’से हमें साधना, तप, त्याग, सदाचार,मन की पवित्रता, स्वच्छता बनाये रखने की प्रेरणा मिलती है.उन्होंने इस पर्व को भक्ति, बंधुत्व, सामाजिक समरसता और एकता के साथ मनाने का अनुरोध किया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी छठ पर्व पर प्रदेश एवं देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि लोक आस्था का यह महान पर्व आत्म अनुशासन का पर्व है, जिसमें लोग आत्मिक शुद्धि एवं निर्मल मन से अस्ताचल एवं उदयीमान भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं.उन्होंने भगवान भास्कर से राज्य की प्रगति, सुख एवं समृद्धि की कामना की और लोगों से इस महापर्व को प्रेम एवं सद्भाव से मनाने की अपील की.कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति का सचेत रहना एवं सावधानी बरतना अत्यंत जरूरी है. छठ महापर्व की शुरुआत सोमवार को नहाय खाय के साथ हो गई और इस दिन व्रती आमतौर पर नदी, तालाबों आदि में स्नान करके प्रसाद ग्रहण करते हैं.यह महाव्रत 11 नवंबर को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ सम्पन्न होगा.


छठ पूजा विधि

छठ पूजा से पहले निम्न सामग्री जुटा लें और फिर सूर्य देव को विधि विधान से अर्घ्य दें. बांस की 3 बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने 3 सूंप, थाली, दूध और गिलास.चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी.नाशपाती, बड़ा नींबू, शहद, पान, साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, चंदन और मिठाई.प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पुड़ी, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू लें.


सूर्य को अर्घ्य देने की विधि

बांस की टोकरी में उपरोक्त सामग्री रखें. सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद सूंप में रखें और सूंप में ही दीपक जलाएं. फिर नदी में उतरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.

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