अमृत महोत्सव में भागीदारी के लिए व्यापक योजना बनायें राज्य : शाह - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

अमृत महोत्सव में भागीदारी के लिए व्यापक योजना बनायें राज्य : शाह

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नयी दिल्ली 12 अप्रैल, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों से कहा है कि वे आजादी के अमृत महोत्सव में गांव, तहसील और जिलाें के स्तर पर सभी की हिस्सेदारी के लिए व्यापक योजना तथा कार्यक्रम बनायें। श्री शाह ने मंगलवार को यहां राज्यों के पर्यटन और संस्कृति मंत्रियों के सम्मेलन, “अमृत समागम” का शुभारंभ करने के बाद कहा , “ सम्मेलन के दौरान हमें ये तय करना है कि कैसे हर गांव, तहसील, ज़िला और प्रदेश की हिस्सेदारी कैसे आज़ादी के अमृत महोत्सव में हो और इसके लिए कार्यक्रमों की रचना करना और उन्हें सफल बनाना है।” उन्होंने कहा , “ आज़ादी के अमृत महोत्सव को पांच वर्गों में मनाने की कल्पना रखी गई है , फ़्रीडम स्ट्रगल, आइडिया @75, अचीवमेंट्स @75, एक्शन @75 और रिज़ॉल्व @75। इन पांच वर्गों में हमें आने वाले समय की प्लानिंग करनी चाहिए। मैं सभी राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों से आग्रह करना चाहता हूं कि हर गांव और राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाना हम सुनिश्चित करें। ” केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत कुल मिलाकर 25000 कार्यक्रम किए गए जिनमें से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 7200 कार्यक्रम हुए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हर घर झंडा, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, डिजिटल जिला रिपॉजिटरी, स्वतंत्र स्वर और मेरा गांव, मेरी धरोहर जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा जिससे जनभागीदारी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा , ‘“ हर घर झंडा कार्यक्रम राज्य सरकारों और पंचायत, नगर निगम, जिला पंचायत, तहसील पंचायत की सहभागिता के बिना सफल नहीं हो सकता। हर स्कूल की हिस्सेदारी के बिना यह सफल नहीं हो सकता और हमें इसे आगे बढ़ाना होगा। मैं आप सबसे अनुरोध करता हूं कि हर घर झंडा, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, डिजिटल जिला रिपॉज़िटरी, स्वतंत्र स्वर और मेरा गांव, मेरी धरोहर- इन सभी कार्यक्रमों की जानकारी लेकर अपने-अपने राज्यों में वो सफल हो इसके लिए हम आगे बढ़ें।” उन्होंने कहा , “ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थलों की पहचान नए सिरे से करानी चाहिए, एक भी गाँव ऐसा नहीं है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के लिए कुछ नहीं किया, एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां कोई बड़ी घटना नहीं हुई। क्या हम उन घटनाओं को, उनकी स्मृति को पुनर्जीवित कर सकते हैं, स्कूली बच्चों को क्या हम स्वतंत्रता सेनानियों के घर, उनके गांव में ले जाने का कार्यक्रम कर सकते हैं। मैं मानता हूं कि ऐसा करने से एक अद्भुत राष्ट्रभक्ति की चेतना जागृत होगी और बच्चे, हमारी नई पीढ़ी इसके साथ जुड़ेगी। ” 

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