बिहार : भाजपाइयों को कुंवर सिंह विजयोत्सव मनाने का हक नहीं : माले - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 21 अप्रैल 2022

बिहार : भाजपाइयों को कुंवर सिंह विजयोत्सव मनाने का हक नहीं : माले

  • कुंवर सिंह हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक, विजयोत्सव कार्यक्रम का भाजपाकरण मंजूर नहीं.
  • 22 अप्रैल को शाहाबाद सहित पूरे बिहार में माले कार्यकर्ता करेंगे नुक्कड़ सभा.

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भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि भाजपा व आरएसएस आजादी के अमृत महोत्सव की आड़ में पूरे इतिहास को उलट-पुलट देने की साजिश तथा स्वतंत्रता आंदोलन के गर्भ से निकले मूल्यों की हत्या करने पर तुले हुए हैं. इस बार बाबू कुंवर सिंह को निशाना बनाया गया है. यही भाजपाई 1857 के गद्दार डुमरांव महाराज की प्रतिमा भी बनवा रहे हैं, जिन्हें बाबू कुंवर सिंह की मौत के बाद उनकी संपत्ति का एक बड़ा भाग अंग्रेजों से इनाम स्वरूप हासिल हुआ था. गद्दार और क्रांतिकारी एक सांचे में कभी फिट नहीं किए जा सकते. 23 अप्रैल का दिन हमारे देश और खासकर शाहाबाद के इतिहास का एक अविस्मरणीय दिन है, जब अंग्रेजों की क्रूरता के खिलाफ उठ खड़े हुए 1857 के महायुद्ध में बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में जगदीशपुर के निकट अंग्रेजों को बुरी तरह पराजित किया गया था और कुछ समय के लिए शाहाबाद से अंग्रेजों की सत्ता उखाड़ फेंकी गई थी. लेकिन इस बार विजयोत्सव के कार्यक्रम का भाजपाकरण किया जा रहा है. सत्ता व जनता की गाढ़ी कमाई का दुरूपयोग करते हुए आयोजित इस भाजपाई कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह आ रहे हैं. अमित शाह का इतिहास क्या है? सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके देश में उन्माद पैदा करना ही इनका पेशा रहा है. देश को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलसा देने वाले भाजपाइयों को बाबू कुंवर सिंह का नाम लेने क्या नैतिक हक है? बाबू कुंवर सिंह हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े समर्थक थे. उनके पत्र संवाद जहानाबाद के 1857 के नेता जुल्फीकार अली से थे. जिससे जाहिर होता है कि उस युद्ध में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच अभूतपूर्व एकता थी. ये सभी क्रांतिकारी अंग्रेजों के खिलाफ एक व्यापक मोर्चाबंदी की चर्चा किया करते थे. 1857 की पहली लड़ाई में हिन्दुओं व मुसलमानों के बीच बनी एकता बाद में भी हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की आधारशिला बनी रही. ऐसी एकता के प्रबल समर्थक बाबू कुंवर सिंह को दंगाई-भाजपाईयों के हाथों कभी हड़पने नहीं दिया जाएगा. शाहाबाद की धरती ऐसे दंगाई मिजाज के लोगों को कभी स्वीकार 22 अप्रैल को भाकपा-माले पूरे राज्य में इसके खिलाफ चट्टी-बाजारों पर विरोध सभा आयोजित करेगी और बाबू कुंवर सिंह की महान विरासत को बचाने के लिए लड़ाई तेज करने का संकल्प लेगी.

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