कविता : बेटी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 31 दिसंबर 2022

कविता : बेटी

उसको भी जीने का हक था।


जिसके आने से पहले ही कर दी विदाई।।


उसकी तो कोई गलती नहीं थी।


जो इस संसार को ही न देख पाई।।


उसने भी पाए थे मां- बाप और भाई।


मगर इस संसार में ही वो न आ पाई।।


तुम्हारी तरह उसे भी भेजा था ईश्वर ने।


फिर क्यूं तुमने उससे पीछा छुड़ाई।।


जब सामने तुम्हारे थी वो आई।


इसलिए उसकी कर दी दुनिया से विदाई।।





Kumari-taniya

कुमारी तानिया

चोरसौ, गरुड़

बागेश्वर, उत्तराखंड

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