जब महावारी के दर्द से तड़पती हैं लड़कियां,
फिर भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाती हैं लड़कियां,
हर मुश्किल से लड़ना जानती हैं लड़कियां,
कांटों से गुज़र कर राह बनाती हैं लड़कियां,
फिर क्यों समझते हो कमज़ोर हैं लड़कियां?
दुनिया से लड़कर जीतना जानती हैं लड़कियां,
मत समझो तुम कि बेबस हैं लड़कियां,
बोल सकती हैं और अपनी आवाज़ उठा सकती हैं,
मगर फिर भी खामोश रहती हैं लड़कियां,
माहवारी के दर्द में उनका साथ तो दो,
वह मज़बूत हैं यह एहसास तो दो,
हर जज़्बात से गुज़र जाती हैं लड़कियां,
जो आंच आये तो दुनिया से लड़ जाती हैं लड़कियां॥
हिमानी
लमचूला, उत्तराखंड
चरखा फीचर्स

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