पटना : ‘बदलो बिहार महाजुटान’ को जनांदोलनों का साझा मंच बना दें : दीपंकर भट्टाचार्य - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 20 जनवरी 2025

पटना : ‘बदलो बिहार महाजुटान’ को जनांदोलनों का साझा मंच बना दें : दीपंकर भट्टाचार्य

  • बिहार पीछे नहीं आगे जाएगा, तानाशाह-दमनकारी सरकार को सत्ता से हटाना हमारी पहली प्राथमिकता
  • बदलो बिहार समागम में विभिन्न आंदोलनकारी ताकतों, नागरिक समाज व आम जनों की हिस्सेदारी, बिहार में बदलाव का दिखा संकल्प, 8 सूत्री प्रस्ताव पारित

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पटना 19 जनवरी (रजनीश के झा)। माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने आज पटना में नागरिक समाज और विभिन्न आंदोलनकारी ताकतों की ओर से आयोजित ‘बदलो बिहार समागम’ को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा दरअसल दमन यात्रा है. कोई मुख्यमंत्री को ज्ञापन न दे सके, उनतक पहंुच न सके इसके लिए चरम दमन किया जा रहा है. एक ओर बिहार को बदल देने का संघर्ष है, दूसरी ओर किसी तरह सत्ता बचाने का दमन अभियान है. उन्होंने कहा कि बदलो बिहार समागम में आज अलग-अलग मुद्दे पर आंदोलित ताकतें एकजुट हुई हैं. लेकिन सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का एजेंडा सबका है. सबलोग बिहार में बदलाव चाहते हैं, लेकिन असल सवाल यह है कि किस दिशा में यह बदलाव होगा? कुछ लोग कहते हैं कि 35 सालों में बिहार बरबाद हो गया, तो क्या 90 के पहले बिहार बहुत अच्छा था? क्या वे बिहार को उसी सामंती दौर में ले जाना चाहते हैं? नहीं, बिहार आगे बढ़ेगा पीछे नहीं लौटेगा. नीतीश जी जब सत्ता में आए अच्छे नारे लेकर आए. लेकिन सवाल अब यह है कि न्याय और विकास का आज हाल क्या है? सरकार ने जो सामाजिक-आर्थिक सर्व कराया उसने बताया कि 20 साल में गरीबी का चरम विकास हुआ है. 94 लाख परिवार 6000 रु. से कम मासिक पर जिंदा है. यह कैसा विकास है? केरल में रसोइयों को 12000 रु. मासिक मिलता है, तमिलनाडु में 10000 रु. लेकिन बिहार में महज 1650 रु. मिलता है. यह कैसा न्याय है? 


बहुत सारी लड़ाइयां चल रही हैं लेकिन पहली जरूरत इस सरकार को सत्ता से बेदखल करना होगा. अपने वाजिब सवालों को लेकर लंबी लड़ाई लड़नी है. यदि जनता की कोई बात सुनी नहीं जाएगी, उनके दुख दर्द को नहीं सुना जाएगा तो ऐसी लाठी-गोली की सरकार और तानाशाही को बिहार बर्दाश्त नहीं करेगा. समागम में बहुत लोगों ने चुनाव की चर्चा की. लेकिन महाराष्ट्र में क्या खेल हुआ? जैसे ही चुनाव आयेगा सारे मुद्दे गायब हो जाएंगे. हमारे मुद्दों को दबाने के लिए बहुत सारी साजिश होगी. आप मजदूरी की मांग करेंगे वे 90 घंटे काम करने की बात करेंगे. मुद्दों को तरह-तरह से भटकाने का काम करेंगे. लेकिन हमें मजबूती से आगे बढ़ना है और सभी आंदोलनों का मोर्चा बनाते हुए एक जनपक्षधर सरकार की दिशा में बढ़ना है. आज के समागम से संकल्प लेना है कि 9 मार्च को पटना के गांधी मैदान में आयोजित बदलो बिहार महाजुटान को सभी आंदोलनों का साझा मंच बना देना है, उसे ऐतिहासिक बना देना है.


समागम को विभिन्न आंदोलनकारी ताकतों व नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया और बिहार में बदलाव का संकल्प लिया. पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, नेता विधायक दल महबूब आलम, एमएलसी शशि यादव, चर्चित चिकित्सक डाॅ. सत्यजीत, दलित अधिकार मंच के कपीलेश्वर राम, मोमिन फ्रंट के महबूब आलम, बिहार राब्ता कमिटी के अफजल हुसैन, शिक्षक सतीश कुमार, एआइपीएफ के कमलेश शर्मा, इंसाफ मंच के गालिब, फुटपाथ दुकानदारों के नेता शहजादे आलम, जस्टिस डेमोक्रेटिक फोरम में पंकज श्वेताभ, सेक्युलर सेवा मंच के कौसर खान सहित आशा, रसोइया व स्कीम वर्कर्स संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया. समागम में माले के पोलित ब्यूरो सदस्य अमर, किसान नेता केडी यादव, शंभूनाथ मेहता, जसम के राजेश कमल, किसन नेता उमेश सिंह, प्रो. सोवन चक्रवर्ती, झुग्गी झोपड़ी वासी संघ के सुरेश रविदास, पुनीत पाठक, विनय कुमार, संजय यादव, फार्मेसी के अरविंद चैधरी, जल्ला किसान संघर्ष समिति के शंभूनाथ मेहता, ऑटो चालक यूनियन के मुर्तजा अली व नवीन मिश्रा, ई रिक्शा के राजदेव पासवान, आइसा के सबीर कुमार व प्रीति कुमारी, महिला विकास समिति की प्रतिमा पासवान, बिहार विद्यालय रात्रि प्रहरी संघ, प्रदेश अध्यक्ष मुकेश कुमार यादव, डीडीटी छिड़काव कर्मचारी संघ के अजय कुमार गुप्ता, संतोष कुमार सिंह, भारत जान विज्ञान समिति के अशर्फी सदा, पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के शारिक, उर्दू टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक संघ के हसन रजा, ललित कला युवा संगठन के नितेश आदि प्रमुख रूप से शािमल रहे. कार्यक्रम का संचालन माले के नगर सचिव अभ्युदय ने की. कार्यक्रम की शुरूआत जसम के साथियों द्वारा बदलो बिहार के आह्वान पर आधारित एक गीत से हुई.


बदलो बिहार समागम के प्रस्ताव

1. आज का समागम सामाजिक समानता व सांप्रदायिक सद्भाव का झंडा बुलंद करते हुए बिहार को सभी के लिए सम्मान, अधिकार और न्याय के रास्ते आगे बढ़ाने का संकल्प करता है, ताकि आने वाले दिनों में बिहार एक समृद्ध और न्यायपूर्ण राज्य बन सके.

2. समागम, बिहार की असली जरूरतों, बुनियादी सुविधाओं और लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए संघर्षरत सभी सामाजिक-आर्थिक समूहों, नागरिक समुदाय और जनता के विभिन्न हिस्सों के बीच व्यापक एकता का निर्माण करने और बिहार को बदल देने के लिए संघर्षों का ज्वार खड़ा करने का आह्वान करता है. इसी कड़ी में, 9 मार्च 2025 को पटना के गांधी मैदान में भाकपा-माले द्वारा आयोजित ‘बदलो बिहार महाजुटान’ में सभी प्रकार की आंदोलनकारी ताकतों का जुटान कर उसे ऐतिहासिक बनाने की भी अपील करता है.

3. समागम भा.ज.पा.-संघ द्वारा देश के संविधान और लोकतंत्र पर लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा करता है. विशेष रूप से संघ प्रमुख द्वारा देश की आजादी को नकारने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी की घोर आलोचना करता है. समागम संविधान व देश के गणतंत्र की रक्षा का संकल्प लेता है और संविधान प्रदत्त अधिकारों के जरिए फासीवादी ताकतों को मुकम्मल तौर पर शिकस्त देने का आह्वान करता है. भाकपा-माले द्वारा चलाए जा रहे संविधान बचाओ अभियान के तहत पूरे राज्य में 26 जनवरी को तिरंगा मार्च में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने की भी अपील करता है.

4. समागम बीपीएससी अभ्यर्थियों पर दमनकारी रुख और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा की आड़ में आतंक फैलाने की कड़ी निंदा करता है. जीविका कार्यकर्ताओं पर सरकार द्वारा किए जा रहे दमन के खिलाफ भी समागम पुरजोर विरोध दर्ज करता है. लोकतंत्र की जननी बिहार में तानाशाही स्थापित करने के ऐसे किसी भी कुत्सित प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. समागम, बीपीएससी पीटी परीक्षा की उच्चस्तरीय जांच, शिक्षा-परीक्षा तंत्र में व्याप्त माफिया तंत्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और आंदोलनकारी छात्रों और जनप्रतिनिधियों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग करता है.

5. समागम सरकारी वादा के अनुसार तमाम गरीबों को 2 लाख रुपये, 5 डिसमिल आवास भूमि और पक्का मकान की गारंटी करने, बिहार में जारी भूमि सर्वे पर रोक लगाते हुए सभी गरीब बसावटों का भौतिक सर्वे कराने और मुसहर, डोम, मेहतर, हलखोर, नट और बखो सहित सभी दलित-गरीब समुदाय बस्तियों को नियमित करने तथा सीलिंग, भूदान, सिकमी और पर्चा वाली जमीन का कागज लोगों को उपलब्ध कराने तथा बेतिया राज की अधिग्रहित जमीन पर गरीबों व जरूरतमंदों को मालिकाना हक देने की मांग करता है.

6. यह समागम खूनचूसक स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने, गरीबों और कृषि कार्य हेतु 200 यूनिट मुफ्त बिजली, 10 लाख से ज्यादा स्कीम वर्कर्स (जीविका दीदी, आशा, आंगनवाड़ी कर्मी, विद्यालय रसोइया, ग्रामीण नर्सों, मनरेगा मजदूरांे, सफाई मजदूरों आदि को केन्द्र सरकार द्वारा घेषित नई मजदूरी दर के मुताबिक पारिश्रमिक/मानदेय की गारंटी करने, वृद्धा-विधवा-दिव्यांग को कम से कम 3000 रुपये की सहायता उपलब्ध कराने, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लूट पर रोक लगाने व उनके उत्पाद की सरकारी खरीद की गारंटी तथा सहारा निवेशकों का पैसा अविलंब वापस करने की मांग पर व्यापक आंदोलन के निर्माण का आह्वान करता है.

7. समागम बिहार में दलितों-पिछड़ों के आरक्षण विस्तार को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल करने और पूरे देश में जातीय गणना कराने की मांग करता है.

8. लगभग उद्योग रहित हो चुके बिहार में बंद पड़े चीनी, जूट, कागज व सूता सहित अन्य मिलों को चालू करने और कृषि आधारित उद्योगों की शृंखला खड़ी करने की विस्तृत कार्य योजना बनाने की मांग के साथ यह समागम गरीबी के दुश्चक्र में फंसे बिहार को बाहर निकालने के लिए विशेष राज्य का दर्जा अविलंब प्रदान करने की मांग करता है.

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