आखिर क्या लिखूं कहानी अपनी?
न अच्छी है और न कुछ बुरी है,
बस दुनिया की भीड़ में जीने चली हूं,
हां, बड़ी मुश्किलों से मैं ढली हूं,
आज किसी की कहानी नहीं,
खुद की कहानी सुनाऊंगी मैं,
बस कहानी लिखी है अपनी,
और आज वही कहानी सुनाऊंगी,
बेटी बेटी कह कहकर दुनिया ने,
न जाने कितनी बार टोका है मुझे,
मगर मुझ पर हुए अत्याचारों को,
क्यों किसी ने नहीं देखा है,
मैं आज सब कुछ लिखकर बताउंगी,
दर्द से भरे लम्हों को मैं फिर से दोहराऊंगी।।
पिंकी अरमोली
सुराग, उत्तराखंड
चरखा फीचर्स

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