1-डिजिटी द्वारा निर्धारित फीस जो की सभी राज्यों द्वारा मान्य की गई है। परंतु मध्यप्रदेश उसे मानने से स्वयं इनकार करता रहा है जो मध्यप्रदेश की निजी आईटीआई के आर्थिक पिछड़ेपन का मुख्य कारण रहा है। जबकि प्रदेश संचनालय हर छोटे से छोटे आदेश को पालन करते एवं कराते है। परंतु इस एकमात्र आदेश से क्यों बचने का प्रयास किया जाता है। 2-डिजिटी के हर आदेश को प्रदेश संचनालय सदैव तोड़-मरोड़ कर अपने अनुशार इमपलीमेंट कराता है । जो पूर्णतय अनुचित है, जैसे थर्ड शिफ्ट ऑल इंडिया मे डिजिटी ने दो वर्ष के लिए जिसमे 2024-2025, 2025--2026 के लिए बड़ाया जाना स्वीकार किया है। को मध्यप्रदेश के संचनालय ने परिवर्तित कर केवल 2024-2026 सत्र यानी एक वर्ष के लिए ही मान्य किया। जिसके लिए पुन: आदोंलन करना पूर्व से प्रस्तावित था, एवं डीएसडी को जबरदस्ती लागू कराया जा रहा है। जबकि 02 वर्ष का डिजिटी की छूट को भी मध्यप्रदेश संचनालय या कोशल विकास बोर्ड स्वीकार नहीं कर पा रहा है। 3-मध्यप्रदेश में अधिकतर क्षेत्र ऐसे है। जो की किसी व्यापारिक या फेक्टरी एरिया से कनेक्ट नहीं है। तो वह संस्थान किस प्रकार डीएसडी को लागू करेंगे, इसका निवारण करने की बजाय निजी संस्थानों को डीएसडी के लिए दबाब क्या निजी स्वार्थ एवं अनुचित अद्देश्य को स्पष्ट नहीं करता है। 4-मध्यप्रदेश मे एकमात्र प्रदेश संचनालय एवं संचालक होने के उपरांत भी कोशल विकास बोर्ड बना कर उनके आपसी टकराव को निजी आईटीआई को झेलना होता है। जिससे प्रदेश संचनालय मे लगातार भ्रष्टाचार बड़ता जा रहा है। जिसका एकमात्र स्पष्ट उदाहरण है- इस बार स्टेट एनओसी जो की अधिकतर संस्थानों की जारी ही नहीं की गई और न ही जारी न करने का कोई जायज कारण स्पष्ट किया गया है। 5-संयुक्त निरीक्षण को केवल एक अस्त्र के रूप मे प्रदेश कौशल विकास बोर्ड ने इस्तेमाल किया है । जिससे लगभग प्रदेश की अबतक 150 से अधिक निजी संस्थानों को खत्म किया जा चुका है। कारण इन निरीक्षणों का केवल मकसद ही निजी संस्थानों को खत्म करना ही है जो की अनुचित है। 6-प्रदेश संचनालय, संयुक्त संचालक, नोडल आईटीआई मे 03 वर्ष से अधिक समय तक एवं स्वयं के जिले मे एक ही पदस्थापना पर कार्यरत अधिकारी केवल तानाशाही एवं भ्रष्टाचार को ही बड़ावा दे रहा है। जिससे निजी संस्थान अत्यंत प्रताड़ित हो रहे है। 7-2018-2019 के ऐसे छात्र जो की करोना के कारण परीक्षा से वंचित रह गए ऐसे छात्रों की बड़ी संख्या मध्यप्रदेश मे अधिक है। अत: प्रदेश की तरफ से डिजिटी से प्रदेश बोर्ड द्वारा अनुरोध किया जाना चाहिए। 8-उत्तरप्रदेश की तरह मध्यप्रदेश मे निजी आईटीआई पास छात्रों को टेबलेट भी शासन द्वारा दिए जाए। 9-प्रदेश संचनालय और संचालक को प्रभावी किया जाए एवं हर निम्न कार्यों से प्रदेश सचिव के सीधे हस्तक्षेप को समाप्त किया जाए क्योंकि आईटीआई की प्रवेश संख्या की गिरावट इसी दखल का प्रतीक है। 10-निजी आईटीआई को भी उत्कृष्ट आईटीआई संवर्धन का फंड है उसमे समल्लित किया जाए जिसके लिए उपलब्द पेरामीटर पर निजी आईटीआई को भी अवसर प्रदान किया जाए। 11-एन ओ सी प्रक्रिया जो की केवल राज्य शासन की डिजिटी निमी पोर्टल पर इंट्री मात्र है को इको फ्रेंडली बनाया जाए जिसके लिए पूर्ण प्रक्रिया यदि राज्य एनओसी देते मे पूर्ण कर रहा है तो एफिलेशन प्रक्रिया राज्य पूरी करे अन्यथा पूर्व की तरह जारी करे नकि इसे भ्रष्टाचार का कारण बनाए। जबभी आईटीआई महासंघ मध्यप्रदेश ने इन मांगों की मांग की है तब तब प्रदेश बोर्ड द्वारा लगातार निरीक्षणों के वावजूद संयुक्त निरीक्षण या जिला डी एम के निरीक्षणों का भए उत्पन्न कर दबाब बनाया है जिसे प्रदेश संघठन कबतक सहन करता अत: ये प्रदेशव्यापी तालाबंदी तो आपसे बातचीत कर इन मुद्दों को सुलझाने का एक मात्र उपाय है अन्यथा फिर आंदोलन किया जाएगा, जो की प्रदेश के सभी संस्थानों को मजबूर किया जाना प्रदेश सरकार, शासन, एवं प्रदेश कौशल विकास बोर्ड की जिम्मेदारी होगी। इन सभी मुद्दों के मद्दे नजर आईटीआई महासंघ के निर्देशन में मध्य प्रदेश की संपूर्ण निजी आईटीआई में अनिश्चित काल के लिए तालाबंदी की जा रही है।

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