- बारिश भी नहीं रोक पाई आस्था की बयार, रथयात्रा बना आस्था का महासंगम, ढोल-नगाड़े, पुष्पवर्षा और जयकारों से गूंज उठी काशी
अष्टकोणीय दिव्य रथ पर नगर भ्रमण
भगवान जगन्नाथ अपने दिव्य अष्टकोणीय रथ पर सपरिवार नगर भ्रमण को निकले। रथयात्रा चौराहे पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भक्त अपलक भगवान की मनोहारी छवि को निहारते रहे। भगवान का रथ पीले फूलों और वस्त्रों से भव्य रूप से सजाया गया। प्रथम दिन भगवान को पीत वस्त्र पहनाए गए और पीले भोज्य पदार्थों का विशेष भोग अर्पित किया गया, जिसमें पके कोहड़े की सब्जी, पूड़ी और हलवे का प्रसाद वितरित किया गया।
सुरक्षा रही अभेद्य
पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए 85 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। रथयात्रा चौराहे पर अस्थायी कंट्रोल रूम स्थापित कर पूरे आयोजन की लाइव मॉनीटरिंग की जा रही है। पुलिस बल व प्रशासन के अधिकारी लगातार भ्रमण कर सुरक्षा का जायजा ले रहे हैं।
रथयात्रा बना आस्था का महासंगम
भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए सजाए गए भव्य लकड़ी के रथों को खींचने के लिए महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भगवान जगन्नाथ 16 पहियों वाले नंदीघोष रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। भक्तों का मानना है कि रथ खींचने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
आज एवं कल के कार्यक्रम
शनिवार (दूसरा दिन) 28 जून
सुबह 5ः11 बजे मंगला आरती व पट खोलना। भगवान को लाल वस्त्र और लाल फूलों से श्रृंगारित किया जाएगा। सुबह 9ः00 बजे कुंवर अनंत नारायण विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
रविवार (तीसरा और अंतिम दिन) 29 जून,
सुबह 5ः11 बजे पुनः मंगला आरती होगी। सुबह 6ः00 बजे इस्कॉन मंदिर की मंडली द्वारा चैतन्य महाप्रभु के भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। सुबह 9ः00 बजे विशेष भोगः छौंके हुए मूंग‑चना, पेड़ा, गुड़‑खांडसारी‑नीबू का तुलसी‑शर्बत अर्पित किया जाएगा। दिनभर सजावट, भक्तों द्वारा रथ खींचना और आरती होनी जारी रहेगी। अंतिम आरती के बाद रात्रि में, भक्तिमय समापन के पश्चात रथ को श्री जगन्नाथ मंदिर में लाया जाएगा।
मुख्य आकर्षण
हर दिन 5ः11 बजे सुबह की आरती पूरे मेले की शुरुआत होती है।
श्रद्धा और संगीत का संगमदृ ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष, भजनों की गूंज।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ीः 85 सीसीटीवी, अस्थायी कंट्रोल रूम, पुलिस‑प्रशासन गश्त।
मेले का बडी सबसे ख़ास मोड़, 16 पहियों वाले नंदीघोष रथ को भक्त खींचते हुए देखना है।

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