- मधुबनी के झंझारपुर में गरजे प्रशांत किशोर, कहा- मोदी जी वोट ले रहे हैं हम लोगों से और फैक्ट्री लगा रहे हैं गुजरात में, बिहार के बच्चे वहां जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं
इस बार वोट लालू, नीतीश, मोदी के लिए नहीं, इस बार वोट बिहार में बदलाव के लिए देना है, इस बार वोट अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए देना है
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में अधिकारी और नेता राशन कार्ड बनाने से लेकर जमीन की रसीद कटाने तक के लिए रिश्वत ले रहे हैं, जिससे आम लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि वह यहां लोगों को जागरूक करने आए हैं, उन्हें अपने बच्चों के भविष्य के लिए वोट करना चाहिए। जनता इस बात से संतुष्ट है कि उसे पांच किलो अनाज, सिलेंडर और बिजली मिल रही है। लेकिन जनता यह नहीं सोचती कि उसके बच्चों को शिक्षा और रोजगार नहीं मिल रहा है। उन्होंने झंझारपुर की जनता से अपील की कि उन्हें और उनके बच्चों को लूटने वाले नेताओं को वोट न दें। अगली बार अपने बच्चों के लिए वोट दें और बिहार में जनता का राज स्थापित करें। बिहार में व्यवस्था परिवर्तन कर जनता का राज स्थापित करने के लिए नेताओं का चेहरा देखकर वोट न करें। चुनाव में वोट लालू, नीतीश और मोदी के चेहरे पर नहीं अपने बच्चों के चेहरे को देखकर दीजिएगा। अगली बार अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए वोट करें। प्रशांत किशोर की जनसभा में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे। दोपहर से ही बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं जनसभा स्थल पर पहुंचने लगे थे और जन सुराज के सूत्रधार को सुनने के लिए उनमें काफी उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शाल ओढ़ाकर और माला पहनाकर सम्मानित किया।
प्रशांत किशोर ने मधुबनी की जनता से किया बड़ा वादा, कहा-दिसंबर 2025 से 60 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक पुरुष और महिला को 2000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी, 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निजी स्कूलों में भी मुफ्त शिक्षा मिलेगी
प्रशांत किशोर ने झंझारपुर की जनता से बड़ा वादा करते हुए कहा कि दिसंबर 2025 से 60 साल से अधिक उम्र के हर पुरुष और महिला को 2000 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस साल छठ के बाद बिहार के युवाओं को 10-12 हजार रुपये की मजदूरी करने के लिए अपना घर-परिवार छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जब तक सरकारी विद्यालयों में सुधार नहीं हो जाएगा, तब तक आप अपने 15 साल से कम उम्र के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाएं और उनकी फीस सरकार भरेगी ताकि गरीब का बच्चा भी अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ सके।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें