- स्टोन के्रशर उद्योग के संचालन में आ रही चुनौतियों के समाधान की मांग, सौंपा ज्ञापन
सीहोर। सरकार ने गिट्टी क्रेशर संचालकों के लिए नए नियम बनाए हैं। इन नियमों का पालन करने में संचालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने जिओ टैगिंग से पहले राजस्व और खनिज विभाग से विसंगतियां दूर करने की मांग की है। साथ ही रॉयल्टी में स्टांप ड्यूटी समाप्त करने की मांग भी की है। इसको लेकर गुरुवार को जिला क्रेशर एसोसिएशन ने कलेक्टर से संबोधित एक ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन की ओर से समाजसेवी सुरेन्द्र रल्हन, भारत गुप्ता, पंकज गुप्ता, राजेश राजपूत, एलम सिंह दांगी, हनीफ, दिनेश पटेल, गोलू राठौर, राजेन्द्र सिंह आष्टा, रविन्द्र यादव, मनोज चौहान, पप्पू नागर, संजय पटेल, तेज सिंह, मेहरवान मेवाड़ा सहित अन्य ने कहाकि हमारी संस्था जो वर्ष 1963 से प्रदेश में स्टोन क्रैशर उदयोग एवं गौड खनिज व्यवसाय के विकास और समय-समय पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के वैधानिक समाधान के लिए कार्यरत है. आज पदेश में लगभग 2000 स्टोन क्रेशर और खदानों का प्रतिनिधित्व कर रही है। वर्तमान परिस्थितियों में स्टोन क्रेशर उद्योग का संचालन अत्यधिक कठिन हो गया। है. जिससे पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन में कमी आई है और शासन को भी राजस्व की हानि हो रही है। इन चुनौतियों के समाधान हेतु खनिज विभाग से अनुरोध किया जाता है कि एक अभियान चलाकर निर्धारित समय-सीमा में निम्नलिखित विसंगतियों को दूर किया जाए।
उदयोग में प्रमुख सुधार हेतु सुझाव:
1. माइनिंग प्लान में यदि कोई रॉयल्टी की मात्रा बढ़ाना चाहता है तो उसे शीघ्र बढ़ाया जाए एवं उस पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी समाप्त की जाए या स्टांप ड्यूटी की गणना वर्तमान भूमि के शासन दवारा निर्धारित वर्तमान मूल्य से की जाए। अभी गणना उत्पादन क्षमता पर रॉयल्टी की दर से लगती है जो अनुचित है क्योंकि उत्पादन की मात्रा सदैव अनुमानित होती है। अनुमानित मात्रा पर स्टांप ड्यूटी लेना उचित नहीं है। ऐसा करने से पट्टेदार को रॉयल्टी उपलब्ध हो सकेगी एवं शासन को भी राजस्व प्राप्त हो सकेगा।
2. सीमांकन प्रक्रिया में सुधार वर्तमान में राजस्व विभाग दवारा सैटेलाइट सर्वे से भूमि का सीमांकन किया जा रहा है जबकि पहले यह कार्य पटवारी दवारा चेन सर्वे से किया जाता था। इससे खदान की वास्तविक स्थिति में अंतर आ जाता है जिससे पट्टेदारों पर अवैध उत्खनन का प्रकरण बन जाता है और उन पर दंडात्मक राशि निर्धारित कर दी जाती है। इस समस्या के समाधान हेतु राजस्व और खनिज विभाग का संयुक्त अभियान चलाया जाए जिससे पट्टेदारों को नियमानुसार उत्खनन करने का अवसर मिले और शासन के राजस्व में भी वृद्धि हो।
3. पर्यावरण स्वीकृति में सुधार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के 9-9-2013 के लेजिस्लेटिव ऑर्डर एवं एसओपी का मध्य प्रदेश में समुचित अनुपालन नहीं हुआ है। जिससे कई खदानों को पर्यावरण अनुमति नहीं मिल पा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अन्य राज्यों में डीआईईएए के अंतर्गत बी-2 श्रेणी की पुरानी खदानों को पूर्ण मान्यता दी गई है। लेकिन मध्य प्रदेश में विभागीय निर्णय में देरी के कारण कई खदानें अवैध घोषित हो रही है। रॉयल्टी क्लियरेंस की प्रक्रिया में संशोधन पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी एवं अन्य सरकारी निर्माण विभाग सीधे कम मूल्य से रॉयल्टी की कटौती कर लेते हैं। जिससे सरकारी ठेकेदार खदानों से रॉयल्टी नहीं लेना चाहते। इस कारण उत्खनन पट्टेदार अवैध श्रेणी में आ जाते हैं।
5. प्रदूषण नियंत्रण मंडल दवारा एनओसी खदान की वैधता तक दी जाती है। ऐसी स्थिति में हर दो माह में प्रदूषण नियंत्रण मंडल से ईसी प्राप्त करना संभव नहीं है क्योंकि प्रक्रिया में ही दो माह का समय लग जाता है। एनओसी के आभाव में उत्पादन नहीं कर सकते हैं। शासन से अनुरोध है की प्रदूषण नियंत्रण मंडल को ईसी की वैधता तक की शर्त पर एनओसी देने के निर्देश दिए आएं। जिससे चार-बार एनओसी लेने की समस्या का समाधान हो सके। इससे पट्टेदार भी उत्पादन कर सकेगा और शासन के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
6. पूर्व में स्वीकृत खदानों पर भूतलक्षी प्रभाव से नए नियम निरुपित नहीं किए जाएं। यह नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध भी है।
7. डीया से प्राप्त श्वष्ट की वैधता से संबंधित प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय अगली पेशी तक इसी के वैधता को बढ़ा देते हैं जो लगभग दो माह होती है वर्तमान में अभी 28 जुलाई 2025 तक वैधता है।
8. प्रदूषण नियंत्रण मंडल दवारा एनओसी दीया की ईसी की वैधता तक भी दी जाती है। ऐसी स्थिति में हर दो माह में प्रदूषण नियंत्रण मंडल से ईसी प्राप्त करना संभव नहीं है क्योंकि प्रक्रिया में ही दो माह का समय लग जाता है। एनओसी के आभाव में उत्पादन नहीं कर सकते हैं।
9. शासन से अनुरोध है की प्रदूषण नियंत्रण मंडल को ईसी की वैधता तक की शर्त पर एनओसी देने के निर्देश दिए जाएं। जिससे बार-बार एनओसी लेने की समस्या का समाधान हो सकें। इससे पट्टेदार भी उत्पादन कर सकेगा और शासन के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
संघ द्वारा उत्पादन एवं विक्रय बंद, इन समस्याओ के समाधान न होने के कारण प्रदेश के इंदौर, भोपाल, धार, देवास, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, बुरहानपुर, आगर, शाजापुर, सीहोर सहित कई जिलो में स्टोन क्रेशर ओनर्स एसोसिएसन में अनिश्चितकालीन उत्पादन एवं विक्रय बंद कर दिया है। अत: हम शाशन से अपील करते है की इन समस्याओ का शीघ्र समाधान किया जाये। जिससे न केवल पट्टाधारो को राहत मिलेगी बल्कि साशन को भी राजस्व की हानि से बचाया जा सके।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें