- पुलिस की सुरक्षा में सेंध लगा मकबरे के अंदर घुसा हिंदू पक्ष
- मकबरे के बाहर व अंदर मजारों में की तोड़फोड़, पूजा-अर्चना कर लौटे
- "मंदिर का नाम, मक़बरा की पहचान !"
मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर नगर के अबूनगर मोहल्ले स्थित तथाकथित शंकर जी सिद्धपीठ ठाकुर जी विराजमान मंदिर के सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण और शिखर निर्माण की अनुमति मांगी है। समिति का कहना है कि मंदिर की वर्तमान स्थिति जर्जर हो चुकी है और आगामी 11 अगस्त से शुरू होने वाली विशेष पूजा से पहले निर्माण कार्य कराया जाना आवश्यक है। हालांकि, जिस स्थान को मंदिर बताया जा रहा है, वह ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के अनुसार मुग़ल काल के वरिष्ठ सूबेदार नवाब अब्दुस समद ख़ान का मक़बरा है, जहां उन्हें दफ़न किया गया था। यह तथ्य "फतेहपुर: ए गज़ेटियर" (लेखक: एच.आर. नेविल, सन उन्नीस सौ छः, पृष्ठ 199–200) में दर्ज है। यह गज़ेटियर यूनाइटेड प्रोविन्सेस ऑफ आगरा एंड अवध की आधिकारिक जिला गज़ेटियर का भाग है। इसके अलावा, "इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ इंडिया" (खंड 12, पृष्ठ 83, सन अठारह सौ इक्यासी) में भी इस मक़बरे का उल्लेख मिलता है। इतिहासकारों के अनुसार, अब्दुस समद ख़ान मुग़ल साम्राज्य के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और सूबेदार थे, जिन्होंने कई मुग़ल बादशाहों की सेवा की थी। उनका मक़बरा अबूनगर क्षेत्र में स्थित है, जिसकी स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व इसे एक महत्वपूर्ण धरोहर बनाते हैं। इसी पृष्ठभूमि में, इस स्थान को मंदिर बताकर उसके स्वरूप में परिवर्तन करने की मांग पर इतिहासकारों और नागरिक समाज के बीच चिंता जताई जा गई है।
- क्या है पक्ष हिन्दू संगठनों का
हिंदू संगठनों का कहना है कि मकबरे में कमल के फूल व त्रिशूल बने हैं, इससे पुष्टि होती है ये एक प्राचीन मंदिर था, जिसे बाद में मकबरे में बदल दिया गया। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने कहा कि दूसरे समुदाय ने मंदिर को मस्जिद के स्वरूप में करने का काम किया है। ये हमारी आस्था का केंद्र है, इसलिए हम लोग हर कीमत में मंदिर में पूजा-पाठ करेंगे। अवैध कब्जा सनातनी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ भी होगा वो प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। हमारे पास बहुत सारे साक्ष्य हैं जैसे- मंदिर में परिक्रमा मार्ग है, धार्मिक कुआं है, कमल-त्रिशूल के निशान हैं। छत्र की जंजीर आज भी मौजूद है। ये सब किसी मस्जिद या मकबरे में नहीं होती।
- क्या बोला मुस्लिम पक्ष
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के मोहम्मद नसीम ने कहा कि फतेहपुर की घटना बहुत निंदनीय है। सैकड़ों साल पुराना हमारा मकबरा है। सरकारी दस्तावेज में 753 नंबर खतौनी में ये जमीन दर्ज है लेकिन मठ संघर्ष समिति और कुछ संगठनों ने अब उसकी भी खुदाई का ऐलान कर दिया है। उसे ठाकुर जी का मंदिर कहकर तमाशा किया जा रहा है जिससे जिले का माहौल खराब किया जा रहा है। मेरी प्रशासन और सरकार से अपील है कि क्या हर मस्जिद और मकबरे के नीचे मंदिर ढूंढा जाएगा? ये लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र है, हम लोग इसको लेकर आंदोलन करेंगे।
- पुलिस ने दर्ज करना शुरू किया मुकदमा
इस प्रकरण के बाद पुलिस ने वीडियो और फोटो के आधार पर मुकदमा दर्ज करना शुरू कर दिया है। पुलिस विभाग द्वारा जारी सूचना के आधार पर विवादित मकबरा स्थल पर जबरदस्ती घुसने/तोड़-फोड़ करने वाले 10 नामजद व 150 अज्ञात उपद्रवियों के विरुद्ध थाना कोतवाली नगर पर मु0अ0सं0 319/2025 धारा 190,191(2),191(3),301, 196 बीएनएस व 07 सीएलए एक्ट एवं 2/3 लोक सम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम का अभियोग पंजीकृत किया गया है। सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु टीमे गठित कर दी गयी है। शीघ्र ही अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर विधिसंगत कार्यवाही की जायेगी।

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