एन. मंडल ने जिलाधिकारी से स्पष्ट मांग की कि 15 अगस्त को इस भूमि पर किसी भी प्रकार का सरकारी कार्यक्रम या झंडोतोलन न हो। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर जल्द से जल्द लिखित आदेश जारी कर इस आयोजन को रोका जाए, ताकि भविष्य में निजी भूमि पर इस तरह के अतिक्रमण और विवाद की पुनरावृत्ति न हो। इस घटना ने गांव में चर्चा और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। कई ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह विवाद और गहरा सकता है। ग्रामीणों का मानना है कि राष्ट्रीय पर्व जैसे 15 अगस्त पर इस तरह के विवादास्पद कार्यक्रम का आयोजन गलत संदेश देगा और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा। एन. मंडल ने चेतावनी दी कि यदि न्यायालयीन आदेश और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई, तो वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई और जनआंदोलन दोनों करेंगे। उन्होंने कहा, “15 अगस्त राष्ट्रीय पर्व है, इसे निजी संपत्ति के अतिक्रमण का मंच नहीं बनाया जा सकता। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और उसका पालन होना चाहिए।”
गौरतलब है कि एन. मंडल न केवल एक फ़िल्मकार हैं, बल्कि एक सक्रिय जनसेवक भी हैं। वे कई वर्षों से सामाजिक और जनहित मुद्दों पर मुखर रहे हैं। इससे पहले भी वे भूमि विवाद, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखते रहे हैं। इस मामले में अब जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में किस तरह का रुख अपनाता है। दसौत भूमि विवाद न केवल एक कानूनी मामला है, बल्कि यह इस सवाल को भी उठाता है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों के लिए निजी संपत्ति का उपयोग बिना मालिक की अनुमति के किया जा सकता है। एन. मंडल का यह कदम भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अब पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं।

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