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गुरुवार, 14 अगस्त 2025

समस्तीपुर : निजी भूमि पर सरकारी झंडोतोलन रोकने को एन. मंडल की DM-CM से अपील

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समस्तीपुर (रजनीश के झा): शिवाजीनगर प्रखंड के दसौत गांव में निजी रैयती भूमि पर प्रस्तावित सरकारी कार्यक्रम और झंडोतोलन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के निवासी, फ़िल्मकार एवं जनसेवक नरेश कुमार मंडल उर्फ़ एन. मंडल ने समस्तीपुर के जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को आवेदन देकर इस कार्यक्रम को रोकने की औपचारिक मांग की है। उन्होंने इसे न केवल कानून और न्यायालयीन आदेश का उल्लंघन बताया, बल्कि निजी संपत्ति के संवैधानिक अधिकार पर भी सीधा हमला करार दिया। एन. मंडल ने अपने आवेदन और सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि मौजा दसौत, खाता संख्या 815, खेसरा संख्या 421 उनके परिवार की खतियानी रैयती संपत्ति है। इस भूमि पर उनका पूर्ण वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला योजना पदाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा 15 जनवरी 2025 को जारी रोक आदेश के बावजूद इस निजी भूमि पर अवैध रूप से नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, उसराही, दसौत का भवन निर्माण किया गया है। एन मंडल ने कहा कि उन्हें हाल ही में सूचना मिली कि 15 अगस्त 2025 को भाजपा के रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक, वीरेंद्र कुमार इस विद्यालय का उद्घाटन और झंडोतोलन करने वाले हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह ग़ैर-क़ानूनी और अनुचित कदम बताया, क्योंकि यह मामला वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया में है और जिला प्रशासन के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने अपने आवेदन में उल्लेख किया कि भूमि विवाद से जुड़ा मामला CWJC No. 423/2025 के तहत माननीय उच्च न्यायालय, पटना में लंबित है। अदालत के आदेश के आलोक में यह मामला वर्तमान में जिलाधिकारी, समस्तीपुर के पास विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी प्रकार का सरकारी आयोजन न केवल न्यायालय की अवमानना होगी, बल्कि भूमि मालिक के संवैधानिक अधिकार का भी हनन होगा।


एन. मंडल ने जिलाधिकारी से स्पष्ट मांग की कि 15 अगस्त को इस भूमि पर किसी भी प्रकार का सरकारी कार्यक्रम या झंडोतोलन न हो। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर जल्द से जल्द लिखित आदेश जारी कर इस आयोजन को रोका जाए, ताकि भविष्य में निजी भूमि पर इस तरह के अतिक्रमण और विवाद की पुनरावृत्ति न हो। इस घटना ने गांव में चर्चा और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। कई ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह विवाद और गहरा सकता है। ग्रामीणों का मानना है कि राष्ट्रीय पर्व जैसे 15 अगस्त पर इस तरह के विवादास्पद कार्यक्रम का आयोजन गलत संदेश देगा और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा। एन. मंडल ने चेतावनी दी कि यदि न्यायालयीन आदेश और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई, तो वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई और जनआंदोलन दोनों करेंगे। उन्होंने कहा, “15 अगस्त राष्ट्रीय पर्व है, इसे निजी संपत्ति के अतिक्रमण का मंच नहीं बनाया जा सकता। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और उसका पालन होना चाहिए।”


गौरतलब है कि एन. मंडल न केवल एक फ़िल्मकार हैं, बल्कि एक सक्रिय जनसेवक भी हैं। वे कई वर्षों से सामाजिक और जनहित मुद्दों पर मुखर रहे हैं। इससे पहले भी वे भूमि विवाद, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखते रहे हैं। इस मामले में अब जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में किस तरह का रुख अपनाता है। दसौत भूमि विवाद न केवल एक कानूनी मामला है, बल्कि यह इस सवाल को भी उठाता है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों के लिए निजी संपत्ति का उपयोग बिना मालिक की अनुमति के किया जा सकता है। एन. मंडल का यह कदम भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अब पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं।

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