वाराणसी : वेतन रोके जाने और निजीकरण की तैयारी पर प्रबंधन को खुली चुनौती - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 13 सितंबर 2025

वाराणसी : वेतन रोके जाने और निजीकरण की तैयारी पर प्रबंधन को खुली चुनौती

  • निजीकरण के खिलाफ़ हुंकार : संविदा कर्मियों की छंटनी और स्मार्ट मीटर थोपने पर गुस्से में बिजली कर्मचारी

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वाराणसी (सुरेश गांधी). उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर बनारस के बिजली कर्मियों का निजीकरण विरोधी आंदोलन शनिवार को लगातार 290वें दिन भी जारी रहा। प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं की तरह वाराणसी में भी कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन कर प्रबंधन के फैसलों का विरोध किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने बिना पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए फेसियल अटेंडेंस को अनिवार्य बना दिया है और इसी आधार पर हजारों कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है। वक्ताओं ने इसे “तानाशाही” करार देते हुए कहा कि वेतन रोककर निजीकरण स्वीकार कराने की कोशिश सफल नहीं होगी। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि जून, जुलाई और अगस्त माह का वेतन अब तक कई हजार कर्मियों को नहीं मिला है, जबकि वे लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि काम करने के बावजूद तीन माह तक वेतन न देना “अमानवीय और गंभीर उत्पीड़नात्मक” कार्रवाई है।


नेताओं ने कहा कि निजीकरण की तैयारी के तहत मई माह में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की गई। 55 वर्ष की आयु पार करने वाले कर्मियों को हटाया गया और कई को “डाउनसाइजिंग” के नाम पर सेवा से बाहर कर दिया गया। इसका असर पूरे प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है। प्रबंधन पर यह भी आरोप लगाया गया कि निजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के घरों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली रियायती बिजली सुविधा समाप्त की जा सके। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि नौ माह से चल रहा यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता और सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त नहीं किया जाता।  सभा को ई. मायाशंकर तिवारी, ई. विजय सिंह, अंकुर पांडेय, योगेंद्र कुमार, विशाल कुमार, गुलजार अहमद, संदीप कुमार, अमित कुमार, नागेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार और राजेंद्र सिंह सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।

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