सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर प्रतिदिन किया जा रहा विशाल भंडारे का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 20 सितंबर 2025

सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर प्रतिदिन किया जा रहा विशाल भंडारे का आयोजन

  • शिव महापुराण की कथा कहती है जन्म मरण और परण महादेव के हाथ में है

Kubereshwar-dham-sehore
सीहोर। तुम्हारे दुख की घड़ी में भोले बाबा हमेशा खड़ा रहेगा। तुम्हारा कष्ट तुम्हें सहना है, कोई दूसरा नहीं सहेगा। परिवार वाले आएंगे, केवल शंकर जी को जल चढ़ाया है तो नंदी ही तुम्हारा दर्द बाटेंगे। देवाधिदेव महादेव पृथ्वी पर रहते हैं, वह तुम्हारे पास आएंगे तुम्हारा दुख हरने के लिए, लेकिन उसके लिए तुम्हें उन्हें दिल से पुकारना होगा। शिव महापुराण की कथा कहती है, जन्म, मरण और परण महादेव के हाथ में है। उक्त विचार जिला मुख्यालय कुबेरेश्वरधाम पर जारी आन लाइन शिव महापुराण के चौथे दिवस अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। शनिवार को विशाल भंडारे आयोजन किया गया, इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।


भगवान का पूजन करो पूर्ण समर्पण होकर करो

शनिवार को पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि दुनिया के कई लोग कहते हैं ईश्वर है, कोई कहता है नहीं है, कोई कहता है मंदिर तक जाओ शंकर की सेवा करो। आराधना करो, कोई कहता है आपको पूजन नहीं करना है, हम तो केवल इतना कहते हैं तुम्हें जो अच्छा लगे उसकी पूजा करो। जिस भी भगवान का पूजन करो पूर्ण समर्पण होकर करो। दुनिया में अच्छे मित्र बड़ी मुश्किल से मिलते हैं, जिस दिन तुम्हें अच्छा मित्र मिल जाए समझ लें महादेव खुद तुम्हारे पास उतर कर आएं है। मित्र ऐसा नहीं चाहिए जो मित्रता को छुड़वा दें, भगवान की भक्ति और कीर्तन करने से मना करें,  मित्र ऐसा चाहिए जो हाथ पकड़कर तुम्हे कथा तक ले जाएं।

 

शक्ति क्षीण हो जाती है और विचार स्थिर नहीं रह जाता

उन्होंने कहाकि जीवन और मृत्यु परमात्मा के हाथ में है। जीव को न स्वयं जन्म चुनने का अधिकार है और न मृत्यु प्राप्त करने का अधिकार है। जीव केवल जी सकता है, जीवन पर उसका कोई अधिकार नहीं है और जब मृत्यु का काल आता है, तो परमात्मा उसे अपने हाथों मृत्यु नहीं देता। वह जीव को स्वयं ऐसी प्रेरणा दे देता है कि वह स्वयं अपने आचरण से अपने व्यवहार से जीवन को नष्ट कर देता है। जब जीवन का अंत काल आता है तो उसकी बुद्धि भ्रमित हो जाती है। वह अच्छे-बुरे का विचार करना छोड़ देता है। अच्छा आचरण करना छोड़ देता है, उसके शरीर से तेज नष्ट हो जाता है, शक्ति क्षीण हो जाती है और विचार स्थिर नहीं रह जाता। वह स्वयं ऐसा आचरण करने लगता है कि उसका जीवन अशांत हो जाए।

कोई टिप्पणी नहीं: