- शिव महापुराण की कथा कहती है जन्म मरण और परण महादेव के हाथ में है
भगवान का पूजन करो पूर्ण समर्पण होकर करो
शनिवार को पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि दुनिया के कई लोग कहते हैं ईश्वर है, कोई कहता है नहीं है, कोई कहता है मंदिर तक जाओ शंकर की सेवा करो। आराधना करो, कोई कहता है आपको पूजन नहीं करना है, हम तो केवल इतना कहते हैं तुम्हें जो अच्छा लगे उसकी पूजा करो। जिस भी भगवान का पूजन करो पूर्ण समर्पण होकर करो। दुनिया में अच्छे मित्र बड़ी मुश्किल से मिलते हैं, जिस दिन तुम्हें अच्छा मित्र मिल जाए समझ लें महादेव खुद तुम्हारे पास उतर कर आएं है। मित्र ऐसा नहीं चाहिए जो मित्रता को छुड़वा दें, भगवान की भक्ति और कीर्तन करने से मना करें, मित्र ऐसा चाहिए जो हाथ पकड़कर तुम्हे कथा तक ले जाएं।
शक्ति क्षीण हो जाती है और विचार स्थिर नहीं रह जाता
उन्होंने कहाकि जीवन और मृत्यु परमात्मा के हाथ में है। जीव को न स्वयं जन्म चुनने का अधिकार है और न मृत्यु प्राप्त करने का अधिकार है। जीव केवल जी सकता है, जीवन पर उसका कोई अधिकार नहीं है और जब मृत्यु का काल आता है, तो परमात्मा उसे अपने हाथों मृत्यु नहीं देता। वह जीव को स्वयं ऐसी प्रेरणा दे देता है कि वह स्वयं अपने आचरण से अपने व्यवहार से जीवन को नष्ट कर देता है। जब जीवन का अंत काल आता है तो उसकी बुद्धि भ्रमित हो जाती है। वह अच्छे-बुरे का विचार करना छोड़ देता है। अच्छा आचरण करना छोड़ देता है, उसके शरीर से तेज नष्ट हो जाता है, शक्ति क्षीण हो जाती है और विचार स्थिर नहीं रह जाता। वह स्वयं ऐसा आचरण करने लगता है कि उसका जीवन अशांत हो जाए।

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