सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर चार क्विंटल मावे की बर्फी का भोग लगाया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर चार क्विंटल मावे की बर्फी का भोग लगाया

  • पहले रोगी और बुजुर्गों को भोजन दे : अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा

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सीहोर। सबसे से पहले रोगी और बुजुर्गों को भोजन दे यह एक धार्मिक मान्यता है जिसका अर्थ है कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले, जैसे भगवान को भोग लगाना या कोई भी अनुष्ठान करना, हमेशा जरूरतमंद लोगों, खासकर बीमार और वृद्धों, को भोजन कराना चाहिए क्योंकि उनकी सेवा करना सबसे बड़ा धर्म और परोपकार का कार्य है। यह मानवतावादी दृष्टिकोण पर आधारित है कि पहले जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए। आपके घर में कोई अनुष्ठान हो रहा है और उस दौरान पूजन अर्चना में लेट हो रहे है तो सबसे पहले आपके घर में कोई रोगी है और बुजुर्ग है तो उसे सबसे पहले कुछ खाने-पीने की व्यवस्था करना चाहिए, यह उसके लिए औषधी है। उक्त विचार आनलाइन चर्चा के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। शुक्रवार को नवरात्रि के पावन अवसर पर सुबह करीब चार क्विंटल से अधिक मावे की बर्फी का भोग लगाया गया और उसके पश्चात नियमित रूप से भंडारे में पहुंचे श्रद्धालुओं को भोजन के साथ मावे की बर्फी की प्रसादी का वितरण किया गया। आनलाइन चर्चा के दौरान पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि कुबेरेश्वरधाम पर कंकर-कंकर भी शंकर है। बेलपत्र के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर शिव-पार्वती की पूजा करने, जड़ में दीपक जलाने या वृक्ष के नीचे बैठकर जप करने से धन, सुख-समृद्धि, संतान और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। बेलपत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है और इसकी जड़ में भगवान शिव का वास होता है। शिव भक्ति कठिन नहीं है, बहुत ही सरल है। हमें हर समय भगवान शंकर का स्मरण मात्र करना है। उन्होंने शिव भक्तों को बताया कि शिव महापुराण कथा कहती है कि भगवान भोलेनाथ बहुत भोले हैं, उनको पाने के लिए किसी तंत्र, मंत्र, बहुत साधना और बहुत घंटों की अराधना और पूजा से नहीं, बल्कि केवल एक लौटा जल लेकर भगवान शंकर को समर्पित कर दें और सारी समस्या का हल हो जायेगा। 

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