दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज्य नहिं काहुहिं ब्यापा॥
बैंगलुरु, 29 सितम्बर, 2025 (विजय सिंह)। सांसारिक जीवन में राम राज्य की कल्पना करते हुए हम सभी एक सुव्यवस्थित, प्रजा पालक, समृद्ध, सशक्त, व्यवस्थित शासन की अपेक्षा रखते हैं लेकिन राम के आदर्शों, आचरण,अनुशासन और संयमित जीवन के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करने में पिछड़ जाते हैं। संभवतः यही हमारे दुःख, क्रोध, अवसाद या विकार के कारण हैं। जिस तरह श्री राम का चरित्र सिर्फ पढ़ने जानने तक सीमित नहीं होकर,अपने दैनिक जीवन में अपनाने का प्रेरक है, उसी तरह रामायण एक महाकाव्य के साथ मानव जीवन में सीखने और आत्मसात करने का वह खजाना है, जिसकेे असीम सागर में एथिकल लीडरशिप ( नैतिक नेतृत्व) के गुणों को सीखने के कई पहलु अब भी अनछुए हैं। पद महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन उसकी सार्थकता तभी है जब उसमें वांछित गुणों का समावेश हो। राम का चरित्र और रामायण के अध्याय हमें इन्हीं गुणों से रूबरु कराते हैं। प्रस्तुत पुस्तक "अनलॉकिंग दि विजडम ऑफ दि रामायण " प्रथम दृष्ट्या ही मनभावन है। धनुष बाण हाथ में लिए 'ब्रह्मांड' के शिखर पर विराजमान श्रीराम के चित्र युक्त कवर पेज का डिजाइन काफी आकर्षित करता है। कवर रहित 212 पन्नों में 40 अध्यायों को समेटे "अनलॉकिंग दि विजडम ऑफ दि रामायण " किताब के रचयिता आनंद महेश तलारी ने बहुत ही बारीकी से पन्ने दर पन्ने श्रीराम के चरित्र, आदर्शों और रामायण की पौराणिक, आध्यात्मिक वर्णन का सामंजस्य करते हुए आधुनिक जीवन शैली, जीवन की बाधाओं से लड़ने, नैतिकतापूर्ण प्रबंधन, संकट प्रबंधन, धैर्य, साहस, पराक्रम, रणनीति, कौशल, त्वरित निर्णय व टीम प्रबंधन को परिभाषित करने का प्रयास किया है।दो दशक से ज्यादा समय से संचार विशेषज्ञ, कहानीकार, व्यावसायिक सलाहकार के रूप में अपनी प्रतिभा से कॉर्पोरेट व साहित्य जगत में संतुलन के साथ भूमिका निभाने वाले आनन्द महेश तलारी ने पुस्तक की प्रस्तावना में लेखक बिबेक देवरॉय द्वारा लिखित "वाल्मीकि रामायण" की प्रेरणा से इस पुस्तक को लिखने का श्रेय बिबेक देवरॉय को देकर अपनी पुस्तक के अंदर के पन्नों में वर्णित नैतिक सीख के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की है। ऐसे तो रामायण के हरेक पन्ने मानव जीवन को नई ऊर्जा देते हैं। अपनी पुस्तक में लेखक ने बाल कांड से लेकर, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, युद्ध कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड का अच्छा चित्रण किया है। अध्यायों में " ओवर कांफिडेंस किल्स", पावर ऑफ क्लारिटी, पावर ऑफ फॉरगिवनेस, बैलेंसिंग काम, अर्थ,धर्म, हनुमान मिशन, दि क्वालिटी ऑफ राम तथा अंतिम अध्याय "सार्थक व संतुष्ट जीवन के लिए रामायण की सीख" पठनीय है। कुल मिलाकर लेखक ने रामायण की पौराणिक कथा और आधुनिक जीवन प्रबंधन में रामायण के महत्व का बेहतर संतुलन कर श्री राम का अनुकरणीय चरित्र चित्रण किया है।
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