शहर के छावनी स्थित बड़ा बाजार-चरखा लाइन स्थित मंदिर में श्रद्धालु समाजसेवी संजय सोनी और रामेश्वर सोनी के द्वारा यहां पर साफ-सफाई के अलावा छप्पन भोग आदि की तैयारियां की गई। इस संबंध में जानकारी देते हुए संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी काल भैरव अष्टमी के पावन अवसर पर शहर कोतवाल बाबा काल भैरव के नाम से प्रसिद्ध मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ महा आरती का आयोजन किया जाता है। लंबे समय से यहां पर श्रद्धालुओं के द्वारा भैरव अष्टमी पर भगवान को छप्पन भोग लगाने के उपरांत भंडारे में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया जाता है। उन्होंने कहाकि मंदिर परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था संजय सोनी और रामेश्वर सोनी देखते हुए हुए आ रहे है। इनका कहना है भैरव की प्रतिमा सैकड़ों साल प्राचीन है।
बुधवार को काल भैरव जी की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान, हवन-पूजन और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। पंडितों के मार्गदर्शन में सुबह से ही भैरव जयंती पर कई कार्यक्रम हुए। मंदिर में भैरव चालीसा का पाठ किया गया, जिसके बाद पंडितों ने हवन कराया। काल भैरव अष्टमी के उपलक्ष्य में भगवान शंकर के साथ ही उनके काल भैरव अवतार की भी पूजा की गई और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया। मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि भगवान भैरव की महिमा कई शास्त्रों में वर्णित है। भैरव को भगवान शिव के गण के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस दिन भगवान शिव ने काल भैरव का अवतार लिया था और भैरव कवच का पाठ असामयिक मृत्यु से बचाव में सहायक माना जाता है।

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