- कीमति स्फटिक और मरकश पत्थर की मूर्तियॉ भी आईं सीहोर

सीहोर। यूॅ तो देशभर में हिन्दु और जैन देवी-देवताओं की एक से बढक़र एक सुन्दर और भव्य प्रतिमाएं हैं जो आकर्षण का केन्द्र रहती हैं लेकिन इसके साथ ही कई बार तब और महत्व बढ़ जाता है जब इन प्रतिमाओं का निर्माण किसी विशेष बेशकीमति पत्थर को तराशकर किया जाता है। नागेश्वर पाश्र्वनाथ जैन मंदिर झालावाड़ राजस्थान में 13.5 फिट लम्बी हरे पन्ना रत्न की प्रतिमा पूरे देश में प्रसिद्ध है। अब इसी तर्ज पर सीहोर में भी पन्ना रत्न की पद्मासन में बनी प्रतिमा स्थापित होने वाली है। इसके साथ ही सफेद स्फटिक और मरकश पत्थर की प्रतिमाएं भी सीहोर आई हैं। उल्लेखनीय है कि आगामी 30 नवम्बर को नगर में स्थित छावनी और कस्बा क्षेत्र के दो जैन श्वेताम्बर मंदिरों में अनेक प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा होने जा रही है। छावनी स्थित प्राचीन ओसवाल जैन मंदिर में पन्ना रत्न से बनी शंखेश्वर पाश्र्वनाथ की प्रतिमा स्थापित होगी। इसकी प्रतिष्ठा का लाभ राजा आनन्द ऋषभ गॉधी परिवार सीहोर ने लिया है। पन्ना रत्न से बनी इस प्रतिमा को लेकर सीहोर सहित आसपास के जैन धर्माबलम्वियों में भी उत्साह है। रत्न से बनी इस प्रतिमा की बहुत मान्यता भी है।
स्फटिक पत्थर से बनी प्रतिमा
सामान्यत: स्फटिक के शिवलिंग, श्रीयंत्र के साथ ही अन्य प्रतिमाओं का चलन और मान्यता देखने को मिलती है। जैन धर्म में भी स्फटिक का महत्व है। सीहोर में बहुत ही गहरे कठोर स्फटिक के पत्थर को तराशकर बनाई गई पाश्र्वनाथ भगवान की आकर्षक प्रतिमा की छावनी स्थित प्राचीन ओसवाल जैन मंदिर में स्थापना होगी। जिसकी प्रतिष्ठा का लाभ वर्षा बहन नरेन्द्र भाई शाह परिवार मुम्बई ने लिया है।
मरकज पत्थर से बनी प्रतिमा
पन्ना रत्न के स्थान पर उपरत्न के रूप में मरकज भी एक कीमति रत्न है। सीहोर के प्राचीन मनमोहन पाश्र्वनाथ जैन मंदिर कस्बा में एक प्रतिमा मरकज पत्थर से बनी हुई स्थापित कराई जा रही है। इसे जयपुर के कलाकार ने बनाया है। इस कीमति प्रतिमा की स्थापना का लाभ मनोज भाई गुजराती गॉधी परिवार मुम्बई ने लिया है। आगामी 28 से 30 नवम्बर तक सीहोर के दो श्वेताम्बर जैन मंदिरों में प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन है जिसकी तैयारियॉ जोरशोर से चल रही है।
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