- विश्व पुस्तक मेले में भक्ति अगाध अनंत पर चर्चा
हिंदू कॉलेज के प्रो. रामेश्वर राय ने पुस्तक के वैचारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय भक्ति साहित्य की व्याख्या लंबे समय तक औपनिवेशिक दबावों के अंतर्गत होती रही है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें उत्तर और दक्षिण भारत—दोनों की भक्ति परंपराओं को समान रूप से स्थान मिला है। उन्होंने इसे हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों का विस्तार बताते हुए कहा कि यह पुस्तक भारतीय समाज की आध्यात्मिक चेतना को समझने में सहायक है। युवा आलोचक पल्लव ने ने पुस्तक की रचना प्रक्रिया की चर्चा की और भक्ति अगाध अनंत जैसे संचयनों का महत्व बताते हुए कहा कि भारत जैसे बड़े सांस्कृतिक समाज में ऐसे विविधतापूर्ण संचयनों से हम अपने साहित्य को संपूर्णता से देख सकेंगे। ग्रन्थ के संपादक माधव हाड़ा ने रज़ा न्यास और राजपाल एंड संज के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि भक्ति चेतना प्रागवैदिककाल से निरंतर प्रवाहमान है और उसमें कभी कोई विच्छेद नहीं आया। उन्होंने कहा कि भक्ति परलोक व्यग्र चेतना नहीं है बल्कि वह पार्थिव सरोकारों और चिंताओं की कविता है। सत्र का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने किया। अंत में राजपाल एंड सन्ज़ की प्रबंध निदेशक मीरा जौहरी ने सभी का आभार प्रदर्शित किया।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें