- विश्व पुस्तक मेले में प्रेमचंद पर चर्चा
सत्र की शुरुआत में अंग्रेजी साहित्य के अध्येता और हिंदू कालेज में आचार्य डॉ सिद्धार्थ कन्नौजिया ने प्रेमचंद की जीवन यात्रा को रेखांकित करते हुए उनके साहित्य और जीवन संघर्ष की साम्यता को दर्शाया। उन्होंने कहा कि कफ़न जैसी कुछ कहानियों से असहमति के बावजूद उनके द्वारा उठाए गए सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। डॉ कन्नौजिया ने शृंखला को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे और चयन आएं तो नए पाठकों को लाभ होगा। चर्चा में सुप्रसिद्ध आलोचक प्रो बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद के पाठक भारत के गांव गांव में हैं यही नहीं अन्य भारतीय भाषाओं के पाठक भी प्रेमचंद को अपना लेखक मानते हैं। प्रो तिवारी ने कहा कि ऐसे चयनों की उपयोगिता में कोई संदेह नहीं तथापि इनकी भूमिकाओं पर भी अलग अलग से बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पर तरह तरह के आरोप लगाने वाले इतिहास की गर्त में हैं और उनके पाठकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। शृंखला के संपादक डॉ पल्लव ने कहा कि प्रेमचंद जैसे महान कथाकार की कहानियों को नए ढंग से प्रस्तुत करना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम, स्त्री, दलित, हिंदू मुस्लिम सद्भाव सहित व्यंग्य कथाओं के ये पांच संचयन तैयार करने में उन्हें भी दृष्टि सम्पन्नता का बोध हो रहा है। उन्होंने सुंदर प्रस्तुतीकरण के लिए प्रकाशन को श्रेय दिया। सत्र का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी विकास गिरि ने किया। अंत में राजपाल एंड सन्ज़ की प्रबंध निदेशक मीरा जौहरी ने सभी का आभार प्रदर्शित किया।

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