- सच्चाई का सामना करना ही सबसे बड़ी तपस्या है : कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा

सीहोर। जिसके हृदय में सच्चाई है, उसके हृदय में भगवान वास करते हैं। सच बोलने से मन पवित्र होता है और यह ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है, सच्चाई का सामना करना ही सबसे बड़ी तपस्या है। धर्म के मार्ग पर सदैव चलते रहना चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह श्रद्धा, भक्ति और सत्य का प्रतीक है। आप जिस भाव से कथा का श्रवण करते है। वहीं आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल पंचायती भवन में नारी शक्ति महिला मंडल और मध्यप्रदेश अग्रवाल महासभा जिला इकाई सीहोर के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय शिव महापुराण के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहे। बुधवार को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का वर्णन किया गया। उन्होंने कहाकि सच्चे मन से की गयी प्रार्थना, कभी विफल नहीं होती। सब की पॉवर व्यर्थ हो जाती है। लेकिन प्रार्थना की पॉवर कभी व्यर्थ नहीं होती है। संसार का ध्यान छोड़ दो। सभी पाप संसार का ध्यान करने से होते हैं। ज्ञानीजन संसार में रहते हैं, लेकिन संसार का कभी ध्यान नहीं करते। ज्ञानी-संत हर समय में भगवान का ध्यान करते हैं। भगवान का ध्यान भले ही न करो, पर किसी मानव शरीर का ध्यान कभी नहीं करना चाहिए। शरीर को सुंदर समझना बड़ा अज्ञान है। भगवान का ध्यान करना चाहिए। पाप और पुण्य तत्काल फल नहीं देते हैं। कालांतर में फल देते हैं। पाप-पुण्य का फल भी तत्काल नहीं मिलता है। पाप और पुण्य कालांतर में फल देते है। भगवान की पूजा करें तो उस पूजा का प्रतिफल आज नहीं मिलेगा। यदि भगवान का कोई ध्यान करें तो उसका मन तुरंत शुद्ध हो जाता है।
भगवान का ध्यान करने से जीव में ईश्वर के सद्गुण आते
कथा वाचक पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि परमात्मा का ध्यान करने से मन की शुद्धि होती है। भगवान का ध्यान किसी भी समय में हो सकता है, परंतु भगवान की पूजा किसी भी समय में नहीं हो सकती है। भगवान का ध्यान करने से जीव में ईश्वर के सद्गुण आते हैं। भगवान निर्दोष होने के साथ ही सर्व सदगुण संपन्न है। जो भगवान का ध्यान स्मरण करता है उस जीव में भगवान की शक्ति आती है। भगवान का भजन करने के लिए सालों नहीं पूरे भाव से करने चाहिए।
आज किया जाएगा भगवान गणेश और कार्तिकय जन्म का वर्णन
नारी शक्ति महिला मंडल और मध्यप्रदेश अग्रवाल महासभा जिला इकाई सीहोर की ओर से जानकारी देते हुए श्रीमती ज्योति अग्रवाल और श्रीमती मंजू अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार को शिव महापुराण के चौथे दिवस भगवान गणेश और कार्तिकय जन्म के विषय में विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
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