कविता : जानते है हम अपनी ज़िंदगी को - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 26 जनवरी 2026

कविता : जानते है हम अपनी ज़िंदगी को

जानते है हम अपनी ज़िंदगी को,

क्या बदल सकते है हम,

सीखेंगे हम सब कुछ,

बनकर दिखाएंगे बहुत कुछ,

मत डालो हम पर ज्यादा दबाव,

नहीं तो हम हो जायेगें परेशान,

दिमाग से निकाल दो उन लोगों को,

जिन्होंने उठाई है उँगलियाँ आप पर,

वो तो हमेशा बोलते रहेंगे,

और हम अपना काम करते रहेंगे,

क्योंकि हम जानते हैं अपनी ज़िंदगी को॥





Babiya-ganv-ki-awaz

बबीता

सैलानी, गरुड़

बागेश्वर, उत्तराखंड

गांव की आवाज 













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