काश मैं होती तितली अगर,
जहाँ मन चाहा उड़ जाती,
जो मन चाहता वो कर पाती,
हर फूल पर बैठ कर,
उससे बाते मैं कर पाती,
तितली के रंग मुझे हैं भाते,
ना जाने इतने रंग कहां से आते,
मेरी पहचान भी एक रंग से होती,
मेरी दुनिया भी रंग बिरंगी होती,
काश मैं अगर तितली होती।।
चाँदनी
कपकोट, उत्तराखंड
गांव की आवाज

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