- कुबेरेश्वरधाम पर हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं का प्रसादी का किया वितरण
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मकर संक्रांति का त्योहार देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। खास बात यह है कि इस त्योहार को देश के हर हिस्से में अलग-अलग नामों और तरीके से मनाया जाता है। दरअसल, मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। साथ ही, यह नई फसल की कटाई का प्रतीक भी माना जाता है। जनवरी के महीने में फसलों की कटाई से जुड़े त्योहार पूरे भारत में इस त्योहार को बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है, लेकिन इनके नाम और रिवाज काफी अलग होते हैं। कुबेरेश्वरधाम पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित श्री मिश्रा के मार्गदर्शन में पर्व मनाया जाएगा। इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक पुरानी परंपरा है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी का स्मरण स्वत: हो जाता है। परंपरा के पीछे केवल स्वाद नहीं, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना जुड़ी मानी जाती है। इसलिए हर साल यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी लड्डूओं के साथ खिचड़ी प्रदान की जाती है।

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