सीहोर : महायज्ञ का पांचवा दिन:हजारों श्रद्धालुओं ने की परिक्रमा, 45 जोडों ने आहुतियां दीं - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

सीहोर : महायज्ञ का पांचवा दिन:हजारों श्रद्धालुओं ने की परिक्रमा, 45 जोडों ने आहुतियां दीं

Mahayagya-sehore
सीहोर। शहर के इतिहास में पहली बार संयुक्त मां कालका उत्सव समिति और क्षेत्रवासियों के सहयोग से प्रसिद्ध करोली माता मंदिर में सहस्त्र चंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ के तीसरे दिन यहां पर मौजूद विप्रजनों के मार्गदर्शन में यहां पर 45 जोंडों ने आहुतियां दी, इसके अलावा हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के द्वारा निरंतर महायज्ञ की परिक्रमा की जा रही है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। भक्तों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21, 51, 108, 151 और 201 बार यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। महायज्ञ में हजारों की संख्या में भक्तों का तांता लगा हुआ है। शुक्रवार को कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी यज्ञ स्थल पर पहुंचे थे।


इस संबंध में जानकारी देते हुए महायज्ञ के मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि शाम को आरती के पश्चात कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर, मुख्य यजमान तरुण राठौर सहित पूरी टीम ने यहां पर आने वाले हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को प्रसादी प्रदान की। यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा के सानिध्य में किया जा रहा है। जो ऐतिहासिक है। इसमें सप्तशती का पाठ और यज्ञ में आहुतियां दी जा रही है। प्रतिदिन सुबह सात बजे से शाम तक यज्ञ किया जाता है और इसके पश्चात नगर भोजन नियमित रूप से किया जा रहा है। यज्ञाचार्य पंडित श्री शर्मा ने बताया कि माघ गुप्त नवरात्रि का पांचवा दिवस है। मां दुर्गा का पंचम रूप स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है। भगवान स्कंद जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। स्कंद मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है। मां का वर्ण पूर्णत शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है। इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है। यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके मां की स्तुति करने से दु:खों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है।

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