सीहोर : छठा सीहोर मेडिसिन अपडेट सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 11 जनवरी 2026

सीहोर : छठा सीहोर मेडिसिन अपडेट सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न

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सीहोर। छठा सीहोर मेडिसिन अपडेट सम्मेलन रविवार को होटल क्रिसेंट में अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक सम्मेलन में सीहोर, राजगढ़, देवास, शुजालपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से लगभग 150 चिकित्सकों ने सहभागिता की। सम्मेलन ने क्षेत्रीय चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा जानकारियों, व्यावहारिक अनुभवों और आपसी संवाद का सशक्त मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने यहां पर चिकित्सकों को संबोधित किया। सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. हीरा दलोद्रिया रहे। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. आर. के. वर्मा एवं डॉ. बी. के. चतुर्वेदी ने कुशल समन्वय किया, जबकि वैज्ञानिक सचिव की भूमिका डॉ. विवेक सक्सेना ने निभाई। सभी आयोजकों के नेतृत्व में सम्मेलन का वैज्ञानिक कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी, अद्यतन और क्लिनिकल प्रैक्टिस केंद्रित रहा। कार्डियोलॉजी सत्रों में डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. विवेक कान्हारे, डॉ. निखिल पेंडसे, डॉ. विकास गोयल, डॉ. शशांक दीक्षित एवं डॉ. सुमित भटनागर ने महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए। डॉ. राजीव गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ हृदय के लिए लिपिड (कोलेस्ट्रॉल) प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान व शराब से परहेज, वजन व तनाव नियंत्रण तथा चिकित्सकीय सलाह से दवाओं के माध्यम से एलडीएल को नियंत्रित कर दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है।


डॉ. शशांक दीक्षित ने हार्ट अटैक प्रबंधन पर जोर देते हुए बताया कि तुरंत मदद बुलाना, एलर्जी न होने पर एस्पिरिन चबाना, शांत रहना और शीघ्र अस्पताल पहुंचना जीवन रक्षक है; समय पर स्टेंटिंग या थक्का-घोलने वाली दवाएं निर्णायक होती हैं। डॉ. सुमित भटनागर ने उच्च रक्तचाप के नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और दवाओं के पालन से हार्ट अटैक व स्ट्रोक की रोकथाम पर प्रकाश डाला। डॉ. विवेक कान्हारे एवं डॉ. निखिल पेंडसे ने वाल्वुलर हृदय रोगों में जैसी नई पद्धतियों की उपयोगिता साझा की। न्यूरोलॉजी से डॉ. संदेश खंडेलवाल, डॉ. अंशुल सिंह, डॉ. मेघना पवार, डॉ. मनीष शक्य एवं डॉ. राहुल जैन ने अद्यतन विषयों पर मार्गदर्शन दिया। मेडिसिन सत्रों में डॉ. रमेश भार्गव, डॉ. गोपाल बाटनी, डॉ. डी. पी. सिंह, डॉ. नर्मदा पटेल, डॉ. भूपेंद्र रात्रे, डॉ. प्रॉमिस जैन, डॉ. मनु गुप्ता एवं डॉ. अनुव्रत भटनागर ने व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।


डॉ. नर्मदा पटेल एवं डॉ. भूपेंद्र रात्रे ने ष्ट्यरू सिंड्रोम पर कहा कि जीवनशैली बदलाव, नियमित जांच और व्यापक जन-जागरूकता से हृदय, गुर्दे और चयापचय संबंधी जोखिमों को नियंत्रित किया जा सकता है। एंडोक्राइनोलॉजी से डॉ. संदीप जुल्का, डॉ. हर्षा पामनानी एवं डॉ. अपूर्वा सुरान तथा डायबिटीज़ से डॉ. उमेश मसंद एवं डॉ. संदीप जैन ने मार्गदर्शन दिया। डॉ. संदीप जुल्का ने गर्भावधि मधुमेह में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के पालन को मां व शिशु के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया। इसके अतिरिक्त पल्मोनोलॉजी से डॉ. लोकेन्द्र दवे, डॉ. दक्ष शर्मा, डॉ. प्रखर अग्रवाल, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से डॉ. पियूष जैन, नेफ्रोलॉजी से डॉ. चेतना, तथा स्त्री रोग से डॉ. श्रेष्ठा सक्सेना, डॉ. रिन्सी रोश एवं डॉ. रुखमणी गुलेरिया ने सहभागिता की। क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. राजेश तिवारी, डॉ. संजय मंडलोई (शुजालपुर), डॉ. चर्चिल मेहता (नरसिंहगढ़), डॉ. अर्चना सोनी (आष्टा) एवं श्री धर्मेंद्र भदौरिया (पचोर) के सहयोग से सम्मेलन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 2025 की नवीनतम चिकित्सा जानकारियों के आदान-प्रदान के माध्यम से चिकित्सकों की क्लिनिकल प्रैक्टिस को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। सम्मेलन की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब प्रसिद्ध कथावाचक एवं आध्यात्मिक गुरु पं. प्रदीप मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने अपने आशीर्वचनों से सम्मेलन को अनुप्राणित किया। 

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