- मकर संक्रांति का आध्यात्मिक संदेश आत्म-चिंतन : अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर। मकर संक्रांति का आध्यात्मिक संदेश आत्म-चिंतन, सकारात्मक ऊर्जा के संचार और आंतरिक शुद्धि का है, जो सूर्य के उत्तरायण होने और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपने विकारों को जलाकर ज्ञान, भक्ति और सद्गुणों को अपनाने, ईश्वरीय सत्ता से जुड़ने, और दूसरों के साथ प्रेम व सेवाभाव बांटने की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। रोटरी क्लब, इनर व्हील क्लब और रेडक्रास सोसाइटी का यह एक दिवसीय मकर संक्रांति काइट कार्निवल का महोत्सव पारिवारिक और सांस्कृतिक है, शहर की सांस्कृतिक पहचान में एक स्वर्णिम अध्याय भी जोड़ेगा उक्त विचार शहर के कोलीपुरा स्थित एक निजी गार्डन में शहर के इतिहास में पहली बार महानगर की तर्ज पर रोटरी क्लब, इनर व्हील क्लब और रेडक्रास सोसाइटी के संयुक्त प्रयासों से एक दिवसीय कार्यक्रम में पहुंचे अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। इस मौके पर रोटरी क्लब के अध्यक्ष मधुर विजयवर्गीय, कपिल अग्रवाल, इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष नेहा विजयवर्गीय और रेडक्रास सोसाइटी के सचिव विपुल चांडक ने कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर सहित अन्य का तिलक कर स्वागत किया। मुख्य अतिथि पंडित श्री मिश्रा ने यहां पर करीब एक एकड़ में बने मैदान पर पतंगबाजी करते हुए लोगों के मध्य पतंग उड़ाई और उसके पश्चात यहां पर लगे 60 से अधिक स्टाल पर पहुंचकर भेंट कर उत्साहवर्धन किया।
डीजे की धुन पर गरबा और अन्य लोक नृत्यों का आनंद
रोटरी क्लब के अध्यक्ष मधुर विजयवर्गीय ने बताया कि रविवार को प्रतिभागी और दर्शक डीजे की धुन पर गरबा और अन्य लोक नृत्यों का आनंद लिया जिससे उत्सव का माहौल और रंगीन हो गया, इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम, खाने-पीने के स्टॉल और अन्य प्रतियोगिताएं भी शामिल की गई थी, शहर भर के 60 से अधिक स्टाल लगाए गए थे। जो पतंग काटता वह मस्ती में झूम उठता, जिसकी पतंग कटती, वह दूसरी पतंग उड़ाकर अपनी हार का बदला लेने की फिराक में जुट जाता। शाम ढलने तक आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पटा हुआ था। उनके जोश में कोई कमी नहीं थी।
गुब्बारों का भी काफी क्रेज देखने को मिला
डीजे की धुन सुनाई दे रही थी छोटे बच्चों में पतंगों की जगह गुब्बारों का भी काफी क्रेज देखने को मिला। डीजे की धुन पर बज रहे गानों के बीच युवाओं और बच्चों ने पतंगबाजी का लुफ्त उठाया। जैसे ही किसी की पतंग कटती तो 'वो काटाÓ का शोर गूंजता। मकर संक्रांति के पर्व को लेकर घरों में तिल के लड्डू, फीनी, पपड़ी, गजक, चूरमा, बाटी सहित कई प्रकार के व्यंजन बनाए गए।
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