पंख लगा दो मेरे मै भी उड़ जाऊंगी,
कभी सूरज तो कभी चांद तक पहुंच जाऊंगी,
पंख लगा दो मेरे मैं पंछी बन जाऊंगी,
चहचहाते हुए फिर सबका मन बहलाऊंगी,
मै बगिया में जाकर फूलों पर मंडराऊँगी,
घर-आंगन को खुशियों से भर जाऊंगी,
लगा दो पंख मेरे मै भी उड़ जाऊंगी॥
कुमारी महेश्वरी
लमचूला, गरुड़
बागेश्वर, उत्तराखंड
गांव की आवाज

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