- संघर्षों से टकराकर प्राप्त की गई सफलताएं स्वाभिमान पैदा करती है अभिमान नहीं : पंडित राघव मिश्रा
पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि हर कोई सफलता चाहता है। सफलता तब मिलती है जब हमारा मन एकाग्र हो। उसमें कोई दुविधा ना हो। कोई कन्फ्यूजन की स्थिति ना रहे। किसी भी तरह से हम विचलित ना रहें। लेकिन, ऐसा कम ही लोग कर पाते हैं। वे लोग विरले ही होते हैं जो अपने मन को इतना एकाग्र रखते हैं कि अपने लक्ष्य से कभी भटकते नहीं हैं। कई जन्मों के पुण्य संचित होते हैं तब जाकर भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिवेणी में गोता लगाने का अवसर प्राप्त होता है। कथा को मनोरंजन के रूप में नहीं लेना चाहिए, कथा मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि मनोमंथन के लिए होता है। कथा सुनकर जाते समय इस बात का मंथन अवश्य करना चाहिए कि कथा की कौन सी बातें हमारे जीवन के लिए अनुकरणीय है, बीच-बीच में भगवान भोलेनाथ के भजनों को सुनाकर स्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने कहा कि कथा सत्संग भाग्य से ही मिलता है। मंदिर में भगवान के दर्शन करने से बड़ी बात भक्ति में रम जाने की है। शब्द ब्रह्म शक्ति है। तन की जल से, मन की धन से और आत्मा की शुद्धि सत्संग से होती है। नारी शक्ति महिला मंडल की ओर से श्रीमती ज्योति अग्रवाल और श्रीमती अंजू अग्रवाल ने बताया कि यहां पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं को पौधा रोपण के लिए पौधों का वितरण किया जा रहा है।

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