- फ्रैंकफर्ट में मजबूत बायर रिस्पॉन्स, ऑर्डर बुकिंग और दीर्घकालिक समझौतों के संकेत
- फ्रैंकफर्ट में भारतीय कालीनों की धूम, 50 निर्यातकों की सहभागिता से विदेशी बाज़ार में बढ़ी माँग : रोहित गुप्ता
सीईपीसी पैवेलियन में व्यापारिक गतिविधियाँ चरम पर
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) द्वारा स्थापित भारतीय पैवेलियन (हॉल संख्या 11.1) चारों दिन विदेशी खरीदारों का प्रमुख केंद्र बना रहा। यूरोप, अमेरिका और स्कैंडेनेवियन देशों से आए बायर्स ने सैंपल अप्रूवल, प्राइस नेगोशिएशन और सप्लाई टाइमलाइन पर गहन बातचीत की। कालीन कारोबारियों के अनुसार, कई निर्यातकों को मल्टी-मिलियन डॉलर वैल्यू के संभावित ऑर्डर मिले हैं, जिनकी शिपमेंट अगले 6 से 9 महीनों में होने की संभावना है।
निर्यात आंकड़े और बाजार संकेत
भारत का कालीन निर्यात मुख्यतः हैंडमेड सेगमेंट पर आधारित है, जिसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि हेमटेक्सटाइल-2026 के बाद यूरोपीय बाजार में भारतीय कालीनों की मांग में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी, प्रीमियम और कस्टमाइज्ड सेगमेंट में बेहतर मूल्य प्राप्ति, तथा निर्यात ऑर्डर की लॉन्ग-टर्म विजिबिलिटी में सुधार देखने को मिलेगा।
सस्टेनेबल कालीनों में यूपी की बढ़त
इस बार मेले में इको-फ्रेंडली, नेचुरल फाइबर और हैंड-नॉटेड कालीनों की मांग सबसे अधिक रही। यह सेगमेंट भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी बेल्ट की पारंपरिक ताकत है, जहाँ हजारों कारीगर हस्तनिर्मित कालीन उत्पादन से जुड़े हैं। विदेशी खरीदारों ने खास तौर पर ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेसेबिलिटी और सोशल कंप्लायंस पर जोर दिया, जिसमें भारतीय निर्यातक खरे उतरते नजर आए।
निर्यातकों में भरोसा, ऑर्डर बुकिंग से संतोष
सीईपीसी के प्रशासनिक सदस्य रोहित गुप्ता एवं उनके भाई गौरव गुप्ता ने बताया कि “हेमटेक्सटाइल-2026 में भारतीय कालीनों को लेकर विदेशी ग्राहकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। कई बायर्स ने रेगुलर सोर्सिंग और सालाना कॉन्ट्रैक्ट की इच्छा जताई है।” उनका मानना है कि यह मेला यूपी कालीन उद्योग के लिए वर्ष 2026 को कारोबार की दृष्टि से मजबूत बनाने वाला साबित होगा।
यूपी कालीन उद्योग के लिए रणनीतिक अवसर
हेमटेक्सटाइल-2026 से मिले संकेत बताते हैं कि यदि डिज़ाइन इनोवेशन, समयबद्ध डिलीवरी और सस्टेनेबल प्रोडक्शन पर फोकस बनाए रखा गया, तो उत्तर प्रदेश का कालीन उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है। यह आयोजन न केवल निर्यात बढ़ाने का माध्यम बना है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, कारीगरों की आय और ‘मेड इन यूपी’ ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने की दिशा में भी अहम साबित हुआ है।
कारीगरी, डिज़ाइन और गुणवत्ता ने जीता भरोसा
भारतीय कालीनों की हाथ से बुनी हुई बारीक कारीगरी, पारंपरिक डिज़ाइन और आधुनिक रंग संयोजन ने विदेशी ग्राहकों को खासा प्रभावित किया। ऊन, सिल्क और प्राकृतिक फाइबर से बने कालीनों की मांग सबसे अधिक रही। कई निर्यातकों को ऑन-द-स्पॉट ऑर्डर मिलने के साथ ही दीर्घकालिक व्यापारिक समझौते भी हुए।
वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड
हेमटेक्सटाइल-2026 में भारतीय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय हस्तनिर्मित कालीन आज भी वैश्विक होम टेक्सटाइल बाजार में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। यह आयोजन न सिर्फ निर्यात बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने वाला भी सिद्ध हुआ।

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