- गोपेश पाण्डेय का जाना सिर्फ एक वरिष्ठ पत्रकार का निधन नहीं, काशी की मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता को लगी गहरी चोट
पंडित गोपेश पाण्डेय स्मृति पुरस्कार की घोषणा
श्रद्धांजलि सभा के बीच एक महत्वपूर्ण घोषणा भी हुई। बीएचयू विधि संकाय के प्रो. क्षेमेन्द्र मणि त्रिपाठी ने अपने शोक संदेश में बताया कि अपने पिता स्व. प्रो. हरिहर नाथ त्रिपाठी की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को ‘पंडित गोपेश पाण्डेय स्मृति पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। यह घोषणा न केवल गोपेश पाण्डेय के प्रति सम्मान है, बल्कि मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता को जीवित रखने का संकल्प भी है। इसके अतिरिक्त सीबीआई के पूर्व डिप्टी एसपी राघवेन्द्र सिंह, बीएचयू के पूर्व प्रो. बी.आर. गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार विनय सिंह एवं राजेश राय ने शोक संदेश भेजकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गोपेश पाण्डेय भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से न हों, लेकिन उनकी निर्भीक कलम, मूल्यनिष्ठ सोच और साहसी विरासत हमेशा बनारस की पत्रकारिता को दिशा देती रहेगी। वे स्मृतियों में नहीं, सिद्धांतों में जीवित रहेंगे।
काशी की पत्रकारिता आपको सदैव याद रखेगी।
नीचे हिंदुस्तान की संपादकीय शैली में ही “बैठक में उपस्थित पत्रकार” को अलग, स्पष्ट और सम्मानजनक रूप से जोड़ा जा रहा है, ताकि खबर और मजबूत व संपूर्ण लगे.
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ व साथी पत्रकार
श्रद्धांजलि सभा में बनारस की पत्रकारिता के विभिन्न दौरों के साक्षी रहे वरिष्ठ और सक्रिय पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें विशेष रूप से वरिष्ठ पत्रकार रजनीश त्रिपाठी, विनय सिंह, राजेश राय, अरविन्द किशोर राय, योगेश कुमार गुप्त, राजनाथ तिवारी, केडीएन राय, बीबी यादव, आशीष बागची, लक्ष्मीकांत द्विवेदी, विश्वनाथ गोकर्ण, शुभाकर दुबे, अखिलेश मिश्र, एके लारी, कुमार अजय, रत्नाकर त्रिपाठी, मनीष उपाध्याय, अजय कृष्ण त्रिपाठी, अन्नू राय, गोकुल शर्मा, संजय मिश्र, सुनील शुक्ला, पंकज त्रिपाठी, राकेश सिंह, सुरेश गांधी, केबी रावत, राजेन्द्र यादव, मोहम्मद अशफाक सिद्दीकी, चेतन स्वरूप श्रीवास्तव, शंकर चतुर्वेदी, अरुण मालवीय, अशोक यादव, कैलाश यादव, चंदन रूपानी सहित अनेक पत्रकार मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि गोपेश पाण्डेय केवल एक नाम नहीं, बल्कि बनारस की निर्भीक, मूल्यनिष्ठ और संघर्षशील पत्रकारिता की पहचान थे। उनकी कमी न सिर्फ पत्रकार संघ, बल्कि पूरे सामाजिक विमर्श में लंबे समय तक महसूस की जाएगी।


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