वाराणसी : बनारस की पत्रकारिता का निर्भीक स्वर मौन हो गया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 13 जनवरी 2026

वाराणसी : बनारस की पत्रकारिता का निर्भीक स्वर मौन हो गया

  • गोपेश पाण्डेय का जाना सिर्फ एक वरिष्ठ पत्रकार का निधन नहीं, काशी की मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता को लगी गहरी चोट

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वाराणसी (सुरेश गांधी). बनारस की पत्रकारिता आज शोकाकुल है। निर्भीकता, ईमानदारी और सिद्धांतों की कसौटी पर जीवन भर खरे उतरे वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पाण्डेय का निधन केवल एक व्यक्ति के जाने की सूचना नहीं है, बल्कि यह काशी की उस पत्रकारिता परंपरा को लगी चोट है, जिसने सच को सत्ता से ऊपर रखा और कलम को कभी झुकने नहीं दिया। उनके जाने से जो रिक्तता बनी है, वह केवल समाचार कक्षों में नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक विमर्श में महसूस की जा रही है। गोपेश पाण्डेय उन विरले पत्रकारों में थे, जिनके लिए पत्रकारिता रोज़गार नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक दायित्व थी। सच कहने की कीमत चाहे जितनी भी हो, उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। न सत्ता का भय, न पद का लोभ और न ही प्रबंधन का दबाव—उनकी कलम हमेशा निर्भीक रही। जब भी सिद्धांतों पर आंच आई, उन्होंने मजबूती से अपना पक्ष रखा। यही कारण था कि वे सम्मान ही नहीं, भरोसे का भी नाम बन गए। मंगलवार को काशी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा इस बात की गवाही बनी कि गोपेश पाण्डेय केवल पत्रकार नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील, सजग और प्रतिबद्ध नागरिक भी थे। पत्रकारिता, राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका योगदान शब्दों में समेटना कठिन है। सभा में हर आंख नम थी और हर मौन में एक गहरा शोक छिपा था।


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काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष के रूप में गोपेश पाण्डेय ने पत्रकारों की एकजुटता, अधिकारों और गरिमा के लिए लगातार संघर्ष किया। वे युवा पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक थे—ऐसे गुरु, जो सिखाते थे कि खबर से पहले इंसान और सच सबसे ऊपर होता है। उनकी सीख थी कि पत्रकारिता की असली ताकत सत्ता के करीब होने में नहीं, बल्कि सच के साथ खड़े होने में है। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र ने की, जबकि संचालन महामंत्री जितेन्द्र श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन गोपेश पाण्डेय के भाई राघवेश पाण्डेय ने दिया। इस अवसर पर प्रो. राममोहन पाठक, एमएलसी धर्मेन्द्र राय, प्रो. सतीश राय, प्रो. अनिल उपाध्याय, रजनीश त्रिपाठी, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल, उनकी पुत्री आकांक्षा पाण्डेय, बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव व शिव कुमार सहित पत्रकारिता, राजनीति और समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। यह आयोजन औपचारिकता नहीं, बल्कि उस प्रेम और सम्मान की अभिव्यक्ति था, जो काशी के जनमानस के हृदय में उनके लिए बसा है।


पंडित गोपेश पाण्डेय स्मृति पुरस्कार की घोषणा

श्रद्धांजलि सभा के बीच एक महत्वपूर्ण घोषणा भी हुई। बीएचयू विधि संकाय के प्रो. क्षेमेन्द्र मणि त्रिपाठी ने अपने शोक संदेश में बताया कि अपने पिता स्व. प्रो. हरिहर नाथ त्रिपाठी की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को ‘पंडित गोपेश पाण्डेय स्मृति पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा। यह घोषणा न केवल गोपेश पाण्डेय के प्रति सम्मान है, बल्कि मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता को जीवित रखने का संकल्प भी है। इसके अतिरिक्त सीबीआई के पूर्व डिप्टी एसपी राघवेन्द्र सिंह, बीएचयू के पूर्व प्रो. बी.आर. गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार विनय सिंह एवं राजेश राय ने शोक संदेश भेजकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गोपेश पाण्डेय भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से न हों, लेकिन उनकी निर्भीक कलम, मूल्यनिष्ठ सोच और साहसी विरासत हमेशा बनारस की पत्रकारिता को दिशा देती रहेगी। वे स्मृतियों में नहीं, सिद्धांतों में जीवित रहेंगे।


काशी की पत्रकारिता आपको सदैव याद रखेगी।

नीचे हिंदुस्तान की संपादकीय शैली में ही “बैठक में उपस्थित पत्रकार” को अलग, स्पष्ट और सम्मानजनक रूप से जोड़ा जा रहा है, ताकि खबर और मजबूत व संपूर्ण लगे. 


बैठक में उपस्थित वरिष्ठ व साथी पत्रकार

श्रद्धांजलि सभा में बनारस की पत्रकारिता के विभिन्न दौरों के साक्षी रहे वरिष्ठ और सक्रिय पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें विशेष रूप से वरिष्ठ पत्रकार रजनीश त्रिपाठी, विनय सिंह, राजेश राय, अरविन्द किशोर राय, योगेश कुमार गुप्त, राजनाथ तिवारी, केडीएन राय, बीबी यादव, आशीष बागची, लक्ष्मीकांत द्विवेदी, विश्वनाथ गोकर्ण, शुभाकर दुबे, अखिलेश मिश्र, एके लारी, कुमार अजय, रत्नाकर त्रिपाठी, मनीष उपाध्याय, अजय कृष्ण त्रिपाठी, अन्नू राय, गोकुल शर्मा, संजय मिश्र, सुनील शुक्ला, पंकज त्रिपाठी, राकेश सिंह, सुरेश गांधी, केबी रावत, राजेन्द्र यादव, मोहम्मद अशफाक सिद्दीकी, चेतन स्वरूप श्रीवास्तव, शंकर चतुर्वेदी, अरुण मालवीय, अशोक यादव, कैलाश यादव, चंदन रूपानी सहित अनेक पत्रकार मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि गोपेश पाण्डेय केवल एक नाम नहीं, बल्कि बनारस की निर्भीक, मूल्यनिष्ठ और संघर्षशील पत्रकारिता की पहचान थे। उनकी कमी न सिर्फ पत्रकार संघ, बल्कि पूरे सामाजिक विमर्श में लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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