परियोजना समन्वयक श्री विपुल कुमार सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उद्यमिता जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग के माध्यम से युवा अपने विचारों को सफल उद्यम में परिवर्तित कर सकते हैं। डीन (एकेडमी) डॉ. शशि भूषण ने कौशल विकास, प्रतिस्पर्धात्मक तैयारी एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने और स्वयं को सक्षम बनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में जिले से आए विभिन्न सफल उद्यमियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को व्यवसाय प्रारंभ करने की व्यावहारिक चुनौतियों एवं अवसरों से अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान वित्तीय साक्षरता पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को बजट प्रबंधन, बचत, निवेश एवं वित्तीय अनुशासन की जानकारी प्रदान की गई। यह सत्र स्टार्टअप कोऑर्डिनेटर श्री सूर्य प्रकाश सिंह द्वारा लिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से विशेषज्ञों से संवाद स्थापित किया। अंत में सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
दरभंगा (रजनीश के झा), 23 फरवरी। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, दरभंगा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार के एमएसएमई-विकास कार्यालय, मुजफ्फरपुर द्वारा समाज रचना केंद्र, पूर्वी चंपारण के सहयोग से “वन डे एंटरप्रेन्योरशिप अवेयरनेस प्रोग्राम” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से परिचित कराना था। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक, एमएसएमई (विकास कार्यालय, मुजफ्फरपुर) श्री अंबूरी शाल्मु राजुलु, दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार, समाज रचना केंद्र के परियोजना समन्वयक श्री विपुल कुमार सिंह तथा डीन (एकेडमी) डॉ. शशि भूषण उपस्थित रहे। अपने संबोधन में श्री अंबूरी शाल्मु राजुलु ने एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं, उद्यम पंजीकरण प्रक्रिया, वित्तीय सहायता, ऋण सुविधा एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ उद्यमिता की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति एवं रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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