- भगवान कृष्ण ने पूतना का किया उद्धार : जगदगुरु पंडित अजय पुरोहित

सीहोर। शहर के छावनी स्थित नगर पालिका के समीपस्थ चमत्कालेश्वर महादेव मंदिर समिति के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के पांचवे दिवस जगद गुरु पंडित अजय पुरोहित ने कलयुग की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि इस युग में हरि नाम का स्मरण ही जीव के कल्याण के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा विचार, वैराग्य और ज्ञान का मार्ग दिखाती है। सत्ययुग, त्रेता और द्वापर की तुलना में कलयुग में कठिन तपस्या या यज्ञ की आवश्यकता नहीं है। रविवार को जगद गुरु ने कहाकि भगवान कृष्ण को जान से मारने के तमाम प्रयास जब राजा कंस के निष्फल रहे तो उसने राक्षसी पूतना को भेजा। पूतना को यह अभिमान था कि वह विष युक्त दूध पिलाकर भगवान को मौत की नींद सुला देगी। हालांकि इसके पीछे भी भगवान का ही वरदान रहा, जिसमें उन्होंने पूतना को राक्षस योनि से मुक्ति दिलाने को कहा था। इस आशीर्वाद का ही असर रहा कि पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान उसका वध कर उद्धार करते हैं। पूतना वासना और माया का प्रतीक हैं। रविवार को उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं के अलावा नंद उत्सव का वर्णन किया। भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला अत्यंत ही अनुकरणीय हैं। इनकी बाल लीला से हमें जीवन में आगे बढ़ने की सीख मिलती हैं। इसके अलावा भगवान शिव भी बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करने पहुंचे। जगदगुरु पंडित श्री पुरोहित ने कहाकि द्वापर युग में राक्षसी एक पूतना थी, जिसनें दूध मुंहे बच्चे कृष्ण के साथ घात किया था, किंतु आज कलयुग में विभिन्न स्वरूपों में पूतना विद्यमान है। आज नारी गर्भावस्था शिशु को मार रही है। इसी मन की कुवृत्ति, स्वभाव का नाम पूतना है। मन में मलिनता आए, मन के बिगड़ने से संपूर्ण जीवन बिगड़ जाता है, यही पूतना का रूप है। बालकों के साथ जो घात करे वही पूतना है। यमुना के पानी को कालिया नाग ने जहर से प्रदूषित कर दिया था, जिसका मर्दन श्रीकृष्ण ने किया। द्वापर में भगवान कृष्ण ने जल संरक्षण एवं प्रदूषण रहित करने का जो कार्य किया वह आज हमें भी वही कार्य अपनाना चाहिए और गंदगी डालकर नदियों को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। पंडित श्री पुरोहित ने कहा कि कंस ने नवजात शिशुओं का वध करने के लिए जिन असुरों को नियुक्त किया था उनमें पूतना सबसे प्रधान थी। पूतना इच्छानुसार रूप बनाकर दिन-रात अबोध बच्चों का वध करती हुई घूमा करती थी, पूतना का सौंदर्य, श्रृंगार, बात करने का ढंग और उसकी शान-शौकत देखकर यशोदामाता ने सोचा कि यह कोई भले घर की स्त्री है इसलिए उन्होंने कोई विरोध नहीं किया और वह सीधे नंदभवन में चली गई। भगवान की ही लीलाशक्ति ने उसे अन्य किसी घर में जाने से रोककर नंदभवन में जाने की प्रेरणा दी। भगवान ने विष पिलाने आई पूतना का वध किया।
आज लगाया जाएगा छप्पन भोग
चमत्कालेश्वर महादेव मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोहर राय ने बताया कि सोमवार को कथा के छठवे दिवस गोवर्धन पूजन के साथ ही छप्पन भोग लगाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से कथा का श्रवण करने की अपील की। उन्होंने बताया कि रविवार को वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने कथा का श्रवण किया।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें