- सेवा, शिक्षा और अनुसंधान के सात साल में 1.5 लाख से अधिक मरीजों को मिला उपचार, रोबोटिक सर्जरी से तकनीकी मजबूती
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बड़ी राहत
संस्थान के निदेशक प्रो. सत्यजीत प्रधान ने बताया कि कैंसर का इलाज अक्सर महंगा होने के कारण गरीब मरीजों के लिए चुनौती बन जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मेडिकल सोशल वर्क विभाग के माध्यम से सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाकर लगभग 50 हजार जरूरतमंद मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया गया। इन मरीजों के इलाज के लिए करीब 500 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता जुटाई गई, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिली। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में जहां 6,307 नए मरीज पंजीकृत हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 27,731 हो गई। स्थापना से अब तक कुल 1.5 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इस दौरान 83,372 सर्जरी, 19,706 रेडियोथेरेपी उपचार तथा 5,53,377 कीमोथेरेपी साइकल पूरे किए गए।
जागरूकता अभियान से रोकथाम पर फोकस
कैंसर की रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए संस्थान ने सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को व्यापक बनाया है। स्कूल-कॉलेजों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाकर तंबाकू सेवन, जीवनशैली और शुरुआती जांच के महत्व पर लोगों को जागरूक किया गया। जिला प्रशासन के सहयोग से ‘ओरल कैंसर उन्मूलन कार्यक्रम’ को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे पूर्वांचल में तेजी से बढ़ रहे मुख कैंसर पर नियंत्रण की दिशा में ठोस पहल मानी जा रही है।
रोबोटिक सर्जरी से तकनीकी मजबूती
तकनीकी उन्नयन के क्षेत्र में संस्थान ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला अस्पताल बन गया है जहां कैंसर सर्जरी के लिए रोबोटिक तकनीक उपलब्ध है। वर्ष 2025 में संस्थान को सीएसआर सहयोग से दो लिनियर एक्सेलेरेटर, एक रोबोटिक सर्जरी यूनिट और एक अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन मिली, जिससे मरीजों की जांच और उपचार प्रक्रिया तेज हुई है तथा प्रतीक्षा अवधि में कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोटिक सर्जरी से जटिल ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ संभव हो रहे हैं और मरीजों की रिकवरी भी तेज हो रही है।
शिक्षा और अनुसंधान में बढ़ता विस्तार
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा रेडियोडायग्नोसिस में एमडी और पैलिएटिव मेडिसिन में डीएनबी पाठ्यक्रम की स्वीकृति मिलने के बाद यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा मजबूत हुई है। संस्थान बहु-विषयक शोध परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिसमें क्लिनिकल डेटा, नई दवाओं के परीक्षण और कैंसर निदान की आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जा रहा है। शोध आधारित उपचार पद्धति से मरीजों को अधिक प्रभावी इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
वैश्विक स्तर की ओर बढ़ते कदम
सात वर्षों की यात्रा में एमपीएमएमसीसी और एचबीसीएच ने यह साबित किया है कि क्षेत्रीय स्तर पर स्थापित संस्थान भी आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और समर्पित सेवा भावना के बल पर राष्ट्रीय पहचान बना सकते हैं। आने वाले वर्षों में संस्थान का लक्ष्य कैंसर उपचार, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बनना है। महामना मदन मोहन मालवीय की सेवा भावना और परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की वैज्ञानिक दृष्टि से प्रेरित यह संस्थान पूर्वांचल के लाखों मरीजों के लिए उम्मीद का मजबूत आधार बन चुका है।

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