पटना : सदन से लेकर सड़क तक विपक्ष की आवाज़ दबा रही सरकार : माले - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

पटना : सदन से लेकर सड़क तक विपक्ष की आवाज़ दबा रही सरकार : माले

  • भोरे से माले के पूर्व प्रत्याशी जितेंद्र पासवान को हत्या के मामले में दोषी करार देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

Cpi-ml-bihar
पटना, 11 फरवरी (रजनीश के झा)। भाकपा (माले) राज्य सचिव कुणाल ने गोपालगंज जिले के भोरे विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के पूर्व प्रत्याशी, राज्य कमिटी सदस्य तथा इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड जितेंद्र पासवान को हत्या के एक मामले में निचले न्यायालय द्वारा दोषी करार दिए जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि जिस मामले में जितेंद्र पासवान को दोषी ठहराया गया है, उससे उनका कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध नहीं रहा है. यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है. उन्होंने आरोप लगाया कि जनता दल (यू) के स्थानीय विधायक तथा बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के दबाव में यह फैसला प्रभावित हुआ है.


उन्होंने कहा कि भाकपा (माले) इस निर्णय के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में अपील दायर करेगी और न्याय की लड़ाई कानूनी व लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेगी. पार्टी को उच्च न्यायालय से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद है. आगे कहा कि जिस प्रकार लोकसभा से लेकर बिहार विधानमंडल तक विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है, वह अत्यंत चिंताजनक है. विपक्षी विधायकों को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है और उन्हें मार्शल आउट किया जा रहा है. यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और लोकतंत्र को कमजोर करने की प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि बिहार में एक ओर छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और अन्य जन मुद्दों पर लोग न्याय की मांग को लेकर सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार विपक्ष के साथ सार्थक संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है. भाजपा के साथ गठबंधन में रहते हुए नीतीश कुमार और जनता दल (यू) भी तानाशाही प्रवृत्ति की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. भाकपा (माले) ने मांग की है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए जनप्रतिनिधियों को सदन के भीतर अपनी बात रखने और जनता के सवाल उठाने का पूरा अवसर दिया जाए. सदन में संवाद और बहस की जो लोकतांत्रिक परंपरा रही है, उसे कलंकित न किया जाए और जनता के हित में सार्थक विमर्श सुनिश्चित किया जाए.

कोई टिप्पणी नहीं: