उच्च शिक्षा के सवाल पर कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव के खिलाफ बनाए गए नियम कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए थे. 2012 में कानून बना, 2016 में रोहित वेमुला और 2019 में पायल तड़वी की संस्थानिक हत्याएं हुईं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यूजीसी ने नियम बनाए, लेकिन भाजपा-प्रायोजित आंदोलनों के दबाव में उन्हीं नियमों पर रोक लगा दी गई. अपने को अति-पिछड़ों का हितैषी कहने वाली मोदी सरकार और यूजीसी - दोनों की चुप्पी बेहद खतरनाक है. कहा कि देश में जब-जब बराबरी के लिए कानून बने, कुछ लोगों ने उसका विरोध किया, लेकिन बराबरी की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सका. इस बार भी यह लड़ाई रुकेगी नहीं और जीत जनता की होगी. सम्मेलन को विधायक संदीप सौरभ, ऐपवा की मीना तिवारी, ऐक्टू नेता आर. एन. ठाकुर, किसान महासभा के नेता उमेश सिंह, असर्फी सदा, पूर्व विधायक मंजू प्रकाश, एमएलसी शशि यादव, मनोज मंजिल, बिरेंद्र गुप्ता, महबूब आलम, सत्यदेव राम, धीरेंद्र झा सहित कई नेताओं ने संबोधित किया. सम्मेलन की अध्यक्षता आशा देवी, सत्य नारायण प्रसाद और शनीचारी देवी ने की, जबकि संचालन शत्रुघ्न सहनी ने किया. मौके पर स्वदेश भट्टाचार्य, अरूण सिंह, के.डी. यादव, अमरजीत कुशवाहा, शिवसागर शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
पटना 2 फरवरी (रजनीश के झा)। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य के सबसे ज्वलंत सवालों - बुलडोजर कार्रवाई, भूमि-अधिकार, बिहार की बेटियों पर बढ़ती हिंसा, रोजगार और शिक्षण संस्थानों में भेदभाव-को लेकर गेट पब्लिक लाइब्रेरी में खेग्रामस के बैनर से विराट सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों से बुलडोजर के सताए गरीबों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन के मुख्य वक्ता माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और निर्णायक जनआंदोलन छेड़ने का आह्वान किया. उन्होंनें कहा कि बीते 20 वर्षों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भूमि सुधार के सवाल से भटककर बुलडोजर की राजनीति पर आ गए हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ द्वारा “माफिया पर बुलडोजर” के नारे को पूरे देश में एक खतरनाक मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है. कहा कि देश बुलडोजर से नहीं, संविधान और कानून से चलता है, लेकिन आज बुलडोजर का इस्तेमाल गरीबों, भूमिहीनों और खासकर मुसलमानों के खिलाफ किया जा रहा है. कहा कि जहां-जहां बुलडोजर का आतंक फैलाया जा रहा है, वहां-वहां लाल झंडा उसके खिलाफ संघर्ष की अगुआई कर रहा है. कई साथी जेल गए, जेल से बाहर आए और वहीं से भूमि आंदोलन को और तेज किया गया. यह संघर्ष अब रुकने वाला नहीं है. आगे कहा कि मतदाता सूची से “घुसपैठिया” और भूमि से “अतिक्रमणकारी” हटाने के नाम पर गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सारी जमीन और संसाधन अडानी-अंबानी जैसे कॉरपोरेट घरानों के हवाले किए जा रहे हैं. रोजगार के अभाव में जो गरीब पहले पलायन करने को मजबूर थे, आज उन्हीं को विकास और रोजगार के नाम पर उजाड़ा जा रहा है और उन्हें ही विकास का दुश्मन बताया जा रहा है.


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