- वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार तथा बिहार संग्रहालय, पटना के सहयोग से जितवारपुर को मिल रही यह अनुपम सौगात
अशोक कुमार सिन्हा, अपर निदेशक, बिहार संग्रहालय ने क्राफ्ट विलेज के नोडल पदाधिकारी के तौर पर उन्हें इस परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने बताया कि मधुबनी से डेढ़-दो किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित जितवारपुर गाँव चार सौ घरों वाला यह देश का इकलौता गाँव है, जिसने देश में सबसे ज्यादा तीन पद्मश्री दिया है। इस गाँव की जगदम्बा देवी को वर्ष 1975 में, श्रीमती सीता देवी को 1980 में और श्रीमती बौआ देवी को 2017 में पद्मश्री हासिल हो चुका है। बढ़ती जनसंख्या के चलते जितवारपुर से सट चुके लहेरियागंज गाँव को अगर जोड़ दें तो पद्मश्री की संख्या 5 पहुँच जाती है। यहाँ के शिवन पासवान और उनकी पत्नी शांति देवी को वर्ष 2024 में पद्मश्री प्राप्त हो चुका है। जितवारपुर के इतिहास का प्रत्येक काल चित्रों और शिल्पों में अमिट छाप छोड़कर गुजरा है। यह गाँव स्कूल ऑफ मिथिला पेंटिंग के नाम से आज चर्चित है, लेकिन यहाँ पेपरमेशी, सिक्की और टेराकोटा शिल्प का निर्माण भी होता है। पेपरमेशी शिल्प में यहां की श्रीमती चंद्रकला देवी को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त है। गाँव में महज 10 फीसदी लोग ही खेती-किसानी या नौकरी करते हैं। शेष लोग हस्तशिल्प पर आश्रित हैं। गाँव का वस्तुतः हर घर एक कला कक्ष है और हर ग्रामीण एक कलाकार। इस गांव का प्रत्येक घर सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। इस गाँव के लगभग 15 लोगों को राष्ट्रीय और 40 को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। जितवारपुर में मिथिला (मधुबनी) चित्रकला की तीनों ही प्रमुख शैलियों के कलाकार मौजूद हैं। आज जितवारपुर की कला को देश-दुनिया में पहुँचानेवाले डब्ल्यू, जी. आर्चर, भास्कर कुलकर्णी, गौरी मिश्रा, पुपुल जयकर, ललित नारायण मिश्रा आदि कला मर्मों की आत्मा जहां कहीं भी होगी, वह जितवारपुर की इस उपलब्धि पर अवश्य मुस्कुरा रही होगी। मोहम्मद आसिफ अहमद, माननीय स.वि.स. (बिस्फी), मधुबनी ने जितवारपुर गांव को क्राफ्ट विलेज के रूप में मिल रही इस अनुपम सौगात के लिए बिहार सरकार तथा भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्राफ्ट विलेज जितवारपुर ग्रामवासियों सहित पूरे मधुबनी जिले के लिए एक वरदान साबित होगा। अब उन्हें अपनी कृतियों को बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर नहीं बेचना पड़ेगा। इस बाजार के माध्यम से कलाकारों को अपनी कलाकृतियों की बाजिव कीमत मिल सकेगी।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए श्री अरुण शंकर प्रसाद, मंत्री, कला-संस्कृति विभाग, बिहार सरकार ने बताया कि जितवारपुर क्राफ्ट विलेज का निर्माण वस्त्र मंत्रालय तथा बिहार संग्रहालय, पटना के सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए केन्द्र सरकार से कुल 9 करोड़, 2 हजार 470 रुपए की स्वीकृति मिली है। इसका 80% खर्च वस्त्र मंत्रालय द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 20% राशि का वहन बिहार संग्रहालय खर्च करेगा। बिहार संग्रहालय प्रबंधन द्वारा क्रियान्वयन एजेंसी के तौर पर बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन को यह जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि किसी भी राज्य में शिल्पग्राम के विकास के लिए वस्त्र मंत्रालय अधिकतम 10 करोड रुपए की राशि देता है, जिसका 20% राज्य सरकार या संबंधित एजेंसी को देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि शिल्पग्राम को मूर्त रुप देने के लिए पहले फेज में गांव के डाकबंगला के पास कॉमन फैसिलिटी सेंटर से सटे भवन में चार कमरे का गेस्ट हाउस बनेगा। इसमें तमाम तरह की उच्च स्तरीय सुविधाएं मौजूद होंगी। हर कमरे में अलग-अलग शौचालय व अन्य सुविधाएं रहेंगी। यहीं पर एक शौचालय का एक ब्लॉक भी बनेगा। इसके अलावा 12 अलग-अलग स्टॉल तैयार किए जाएंगे। इन पेपरमेशी, सुजनी कला, टेराकोटा आदि कलाओं को भी इसमें स्थान मिलेगा। डाकबंगला की बीच की खाली जमीन की घेराबंदी कर उन्हें पक्का किया जाएगा। सभी स्टॉल पर मधुबनी पेंटिंग, गोदना पेंटिंग आदि लोककला सामग्रियाँ मौजूद होंगी। उन स्टॉल के आसपास बागवानी की भी योजना है। गांव में प्रवेश से पहले एक भव्य प्रवेश द्वार बनेगा। यह प्रवेश द्वार आगंतुकों को दूर से ही शिल्प ग्राम झलक देगा। प्रवेश द्वार को बेहतरीन मधुबनी पेंटिंग से सुसज्जित किया जाएगा। गांव में तीन सरकारी तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा और उनके चारों ओर भी पेड़ लगाएं जाएँगे। इन तालाबों को चारों ओर से रंगीन ईंटों तथा पत्थरों से सजाया जाएगा। इस योजना के तहत जितवारपुर गांव की सड़क को भी पक्का किया जाएगा। गांव में करीब सौ स्ट्रीट लाइट लगवाएं जाऐंगे। गांव के घरों की बाहरी दीवाल पर मधुबनी पेंटिंग बनेगी। इसके लिए विभाग की ओर से हर घर के बाहरी दीवालों की सफेद रंग से पोताई होगी। घर में रहने वाले कलाकार खुद अपनी दीवारों पर मधुबनी पेंटिंग उकेरेंगे। शिल्पग्राम का तो पूर्ण विकास होगा ही साथ-साथ कला के क्षेत्र में अपनी पहचान रखने वाला गांव रांटी एवं रैयाम को भी विकसित करने की योजना है। एक वर्ष के अंदर तमाम कार्य पूरा कर लेने का लक्ष्य है।*
अपने अध्यक्षीय संबोधन में अंजनी कुमार सिंह, महानिदेशक, बिहार संग्रहालय ने बताया कि देश के अधिकांश राज्यो में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से क्राफ्ट विलेज बने हुए हैं। मसलन, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), रघुराजपुर (ओडिशा) तिरुपति (आंध्र प्रदेश), महाबलीपुरम (तमिलनाडु) आमेर (राजस्थान) भुज (गुजरात), नैनी (उत्तर प्रदेश) ताजगंज (उत्तर प्रदेश) इत्यादि, लेकिन बिहार में आज तक एक भी क्राफ्ट विलेज नहीं था, जबकि मधुबनी का जितवारपुर, रांटी, रैयाम, मुजफ्फरपुर का भूसरा एवं गया जिले का पत्थरकट्टी गाँव क्राफ्ट विलेज के सभी शर्तों को पूरा करता है। वर्ष 2019 में ही जितवारपुर को क्राफ्ट विलेज बनाने प्रस्ताव वस्त्र मंत्रालय को भेजा गया था, लेकिन किसी कारणवश वह स्वीकृत नहीं हो सका। फिर वर्ष 2025 में मैंने पुनः जितवारपुर गांव को क्राफ्ट विलेज बनाने का प्रस्ताव वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा। 6 जून 2025 को सचिव, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के बी. के. झा.. सहायक निदेशक, वस्त्र मंत्रालय, मधुबनी ने कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को क्राफ्ट विलेज सहित वस्त्र मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इनके अलावा चारों पद्मश्री कलाकारों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में अरुण कुमार, महाप्रबंधक, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने उक्त परियोजना हेतु वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार तथा बिहार संग्रहालय की इस पहल की प्रशंसा करते हुए आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।


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