सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर आज भजन गायक देंगे प्रस्तुति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर आज भजन गायक देंगे प्रस्तुति

  • सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे पिता का अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने किया सम्मान
  • कुबेरेश्वर धाम में भव्य रुद्राक्ष महोत्सव 2026 का शंखनाद: शिवमहापुराण कथा के प्रथम दिन उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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सीहोर। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कुबेरेश्वर धाम में शनिवार से सात दिवसीय भव्य रुद्राक्ष महोत्सव 2026Ó का भव्य शुभारंभ हुआ। इस मौके पर प्रथम दिवस मंदिर परिसर में हजारों रुद्राक्ष से निर्मित शिव लिंग का पूर्ण विधि-विधान से पूजन अर्चन के पश्चात दोपहर में कथा का आयोजन किया गया। इस मौके पर कथा के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहाकि जब तुम्हारे मन में अशांति हो, बैचानी हो दस मिनिट के लिए वृक्ष के नीचे भगवान शिव का ध्यान करें। जब तक हमारा मन शांत नहीं होगा, ईश्वर के प्रति आस्थावान नहीं होगा, तब तक मनुष्य जीवन की सार्थकता नहीं है। कथा के पहले दिन महाराष्ट्र से पैदल चलकर आए एक पिता का पंडित श्री मिश्रा ने सम्मान किया। पैदल चलकर आए पिता का पत्र का उल्लेख करते हुए पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि पत्र में लिखा है कि उनकी बेटी को रोजगार नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने संकल्प लिया था, संकल्प पूर्ण होते ही उन्होंने अपने क्षेत्र से धाम तक पैदल यात्रा की। शनिवार को कथा के दौरान यहां पर आए श्रद्धालुओं को विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य ने यहां पर बनाई गई भव्य भोजनशाला से निशुल्क भोजन की व्यवस्था की। कथा के पहले ही दिन विशाल परिसर में बनाए गए पंडाल भरा चुके है। समिति के द्वारा भी परिसर में श्रद्धालुओं को एलईडी लगाई गई है।


1. विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि कुबेरेश्वर धाम का महत्व: पंडित श्री मिश्रा बताया कि भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार ट्रेन के लिए स्टेशन और फ्लाइट के लिए एयरपोर्ट जाना होता है, उसी तरह महादेव को पाने के लिए कुबेरेश्वर धाम आना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह धाम 12 ज्योतिर्लिंगों के मध्य में स्थित है और यहाँ वही आता है जिससे बाबा स्वयं प्रेम करते हैं।

2. बेटी और बहू के सम्मान का संदेश: कथा के दौरान पंडित जी ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा,  'बेटी आपके पुण्यों की रसीद है।Ó उन्होंने एक नया नारा देते हुए कहा कि अब केवल 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओÓ ही नहीं बल्कि 'बहू पढ़ाओ, देश बचाओÓ के संकल्प की आवश्यकता है। जिस घर में बेटी और बहू का सम्मान होता है, वहाँ दरिद्रता कभी नहीं आती।

3. जल संरक्षण की सीख: पर्यावरण के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि शादियों में पानी की बर्बादी रोकना अनिवार्य है। पानी की बोतलों पर लिखा होना चाहिए-  'मैं जल हूँ, आने वाला कल हूँ।Ó यदि हमने आज जल का सम्मान नहीं किया, तो भविष्य में इसके लिए तरसना पड़ेगा।

4. भगवान की 'शरणÓ और 'चरणÓ का अर्थ: पंडित जी ने समझाया कि मंदिर में सिर झुकाना भगवान के 'चरणोंÓ में होना है, लेकिन मंदिर से निकलकर कार्यक्षेत्र पर जाते समय भगवान को याद रखना उनकी 'शरणÓ में होना है।

5. अशोक सुंदरी और देवराज ब्राह्मण का प्रसंग: कथा में राघव मिश्रा ने भजनों की प्रस्तुति दी और देवराज ब्राह्मण की कथा सुनाई, जिन्हें मात्र कुछ क्षण शिवपुराण सुनने से मोक्ष प्राप्त हुआ। पंडित जी ने महादेव की पुत्री अशोक सुंदरी के जन्म और उनके द्वारा किए गए कठिन जप का वर्णन भी विस्तार से किया।


कार्यक्रम की रूपरेखा:कथा के दौरान पंडित जी ने भक्तों द्वारा आए पत्रों को पढ़ा और श्रद्धालुओं के बीच बेलपत्र का वितरण किया। यजमानों के नामोच्चार और सामूहिक शिव आरती के साथ प्रथम दिन की कथा का विश्राम हुआ। यह महोत्सव आगामी 20 फरवरी तक अनवरत जारी रहेगा। विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी के पावन सानिध्य में इस वर्ष महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में श्री कुबेरेश्वर धाम में एक अनूठा और पर्यावरण-हितैषी 'ग्रीन शिवरात्रिÓ महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।


विशेष आकर्षण: ज्योतिर्लिंग गार्डन

इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण 'ज्योतिर्लिंग गार्डनÓ की स्थापना है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा परिसर में 12 विशेष पौधे रोपे जाएंगे जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इन पौधों को धाम से उनकी वास्तविक भौगोलिक दूरी के आधार पर स्केल डिस्टेंस पद्धति से रोपित किया जाएगा।


प्रमुख दूरियाँ (किलोमीटर में):

श्री महाकालेश्वर: 127.00 किमी

श्री ओंकारेश्वर: 135.00 किमी

श्री केदारनाथ: 864.00 किमी

श्री रामेश्वरम: 1557.00 किमी


पर्यावरण संरक्षण के तीन मुख्य संकल्प, आयोजन के दौरान तीन प्रमुख बिंदुओं पर विशेष बल दिया जाएगा:

1. बेलपत्र पौधारोपण: प्रकृति की सेवा हेतु धाम में व्यापक स्तर पर बेलपत्र के पौधे लगाए जाएंगे।

2. अभिषेक जल का सदुपयोग: शिवलिंग पर अर्पित किए गए जल को व्यर्थ बहने से रोककर उसे भूगर्भ जल पुनर्भरण और पौधों की सिंचाई हेतु उपयोग में लाया जाएगा।

3. वैज्ञानिक निर्माल्य विसर्जन: पूजा के बाद एकत्रित फूलों और बेलपत्रों (निर्माल्य) को नदियों में विसर्जित करने के बजाय उनसे जैविक खाद बनाई जाएगी।

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