सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर आज कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर होंगे रुद्राक्ष महोत्सव में शामिल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

सीहोर : कुबेरेश्वरधाम पर आज कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर होंगे रुद्राक्ष महोत्सव में शामिल

  • आज फुलेरा दूज पर किया जाएगा भगवान शिव को धतुरा समर्पित, पांच क्विंटल  फूलों से किया जाएगा विशेष श्रृंगार
  • मेहनत का फल, मुसीबतों का हल और आने वाला कल सब महादेव के हाथ में है-अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा

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सीहोर। मेहनत का फल, मुसीबतों का हल और आने वाला कल सब महादेव के हाथ में है।  निस्वार्थ भाव से कर्म करना चाहिए और फल के लिए ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वे ही सब कुछ नियंत्रित करते हैं।  महादेव पर विश्वास रखना हमें हर मुश्किल से बाहर निकालता है। सच्ची मेहनत से ही जीवन में सफलता मिलती है, जिसे भगवान सही समय पर देते हैं। जब सब कुछ शिव के हाथ में है, तो व्यर्थ की चिंता न करें और महादेव के नाम का स्मरण करें। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वधाम पर जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के अंतर्गत भव्य शिव महापुराण के पांचवे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा, कथा वाचक राघव मिश्रा, पंडित शिवम मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला और पंडित विनय मिश्रा आदि ने सुबह धाम पर रुद्राक्ष निर्मित शिव लिंग का विशेष अभिषेक किया।


श्रद्धालु उन्नति, प्रगति और कुबेर का आर्शीवाद लेने वाले ही कुबेरेश्वरधाम पर आते

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पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि सच्चा इंसान वही है जो किसी और के दर्द और तकलीफ को समझे, तस्वीर और तकलीफ में अंतर है। तस्वीर में साथ खड़े होने वाले तकलीफ में साथ नहीं खड़े होते है। दर्द, विपत्ति और तकलीफ में तो भगवान शिव ही आपके साथ खड़ा होगा।  शिव का द्वार ही ऐसा ही जहां आपकी तकलीफ का समाधान होगा। इसलिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उन्नति, प्रगति और कुबेर का आर्शीवाद लेने वाले ही कुबेरेश्वरधाम पर आते है। 


रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर बनेगा सेवा और वैज्ञानिक शोध का वैश्विक केंद्र; विश्वास ही साक्षात् शिव है: पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर की पावन धरा पर जारी 'शिवमहापुराण कथाÓ के पांचवें दिन रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर की भविष्यगामी योजनाओं और आध्यात्मिक चेतना पर विस्तृत चर्चा हुई। महोत्सव में लाखों की संख्या में उमड़े जनसैलाब के बीच धर्म, विज्ञान और सामाजिक संस्कारों का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला।


रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर: संकल्प से सिद्धि तक महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर को प्रमुखता देते हुए बताया गया कि यह केंद्र केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा।

नदी पुनरुद्धार: सेंटर ने सीहोर की जीवनदायिनी 'सीवन नदीÓ के पारिस्थितिक पुनरुद्धार का बीड़ा उठाया है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: यहाँ रुद्राक्ष के औषधीय गुणों और जल प्रबंधन पर आधुनिक शोध किए जाएंगे। पंडित श्री मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सेंटर का लक्ष्य आध्यात्मिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जन-जन तक पहुँचाना है। कथा के विशेष सत्र में पंडित राघव मिश्रा  ने भक्त और भगवान के संबंधों को परिभाषित किया: दो भाव, दो मार्ग भक्ति में 2 प्रकार के भाव होते हैं- 'मर्कट भावÓ (बंदर जैसा) और 'मार्जार भावÓ (बिल्ली जैसा)। हमें महादेव के प्रति 'मार्जार भावÓ रखना चाहिए, ताकि हमारे जीवन का पूर्ण उत्तरदायित्व स्वयं शिव स्वीकार करें।

शिव नाम का चश्मा: उन्होंने कहा कि संसार को देखने का हमारा नजरिया 'शिवमयÓ होना चाहिए। यदि हम शिव नाम का चश्मा पहन लें, तो हमें सर्वत्र कल्याण ही दिखाई देगा।

पंडित प्रदीप मिश्रा का विस्तृत जीवन दर्शन: अनुभव और संस्कार

पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में जीवन के व्यावहारिक और आध्यात्मिक पक्षों को विस्तार दिया। अनुभव की त्रिवेणी: पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि माता, पिता, गुरु, संत और सिपाही- ये 5 ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनका अनुभव कभी पुराना नहीं होता। उन्होंने युवाओं से कहा कि आज के डिजिटल दौर में अपनों के पास बैठना न भूलें।  'एक रिटायर्ड सिपाही का अनुभव आपको वह अनुशासन सिखा सकता है जो दुनिया की कोई किताब नहीं सिखा सकती। दिखावे का खंडन: पंडित जी ने कहा कि  आपका विश्वास ही शिव है। यदि दान और भक्ति में 'प्रदर्शनÓ या 'अहंकारÓ जुड़ जाए, तो वह पुण्य फल शून्य हो जाता है। तीन चीजें महादेव के हाथ में: उन्होंने बताया कि जीवन की 3 सबसे महत्वपूर्ण चीजें- मेहनत का फल, मुसीबत का टलना और आने वाला कल- केवल महादेव के हाथ में हैं।

 

मध्य प्रदेश भाजपा के प्रभारी डॉ महेंद्र सिंह ने महोत्सव में सम्मिलित होकर रुद्राक्ष महादेव की अर्चना की। उन्होंने कहा रुद्राक्ष महादेव का यह स्वरूप अलौकिक है। इनके दर्शन में एक साथ 12 ज्योतिर्लिंग (द्वादश ज्योतिर्लिंगों) के पुण्य और प्रताप का दर्शन होता है। पूज्य गुरुदेव के माध्यम से यहाँ जो सेवा कार्य हो रहे हैं, वे वन्दनीय हैं। '


महत्वपूर्ण सूचनाएं एवं व्यवस्था

स्वास्थ्य परामर्श पंडित श्री मिश्रा ने अत्यधिक भीड़ को देखते हुए बीमार व्यक्तियों को धाम न लाने की भावुक अपील की।


करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है कुबेरेश्वरधाम

समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि गुरुवार को सुबह फूलेरा दूज के मौके पर पांच क्विंटल फूलों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा, इसके अलावा धतुरा अर्पित किया जाएगा और हल्दी चढ़ाई जाएगी। वहीं कथा के दौरान कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर शामिल होंगे। वहीं 20 फरवरी को कथा का समय सुबह आठ बजे से 11 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि 12 ज्योर्तिलिंग के मध्य में बने 75 एकड़ के भव्य कुबेरेश्वधाम में पांच दिन से चल रही शिव महापुराण कथा में भक्ति का समुंद्र लहरा रहा है। कितने ही ऐसे परिवार रोज पहुंच रहे हैं, जिनके शिव की भक्ति करने बाद जीवन में बड़े बदलाव आए हैं। वे चि_ी के जरिए अपने दुखों को हरे जाने की कहानी बताते हैं। कैसे एक लोटा जल शिवजी को चढ़ाया और उनकी दुनिया ही बदल गई। ऐसे श्रद्धालुओं को पं. प्रदीप मिश्रा मंच पर बुलाकर उनको बेल पत्र भी देते हैं। 

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