सीहोर : जनता को गंदे पानी की सप्लाई, प्रशासन अपने हाथों में ले शहर की जल प्रदाय व्यवस्था - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

सीहोर : जनता को गंदे पानी की सप्लाई, प्रशासन अपने हाथों में ले शहर की जल प्रदाय व्यवस्था

  • कायरी फिल्टर प्लांट दो साल से रिपेयरिंग के अभाव में पड़ा है बंद
  • पार्वती नदी से सीधे नागरिकों तक सप्लाई किया जा रहा है गंदा पानी : शमीम

Sehore-cingress-protest
सीहोर। कांग्रेस कार्यालय में बुधवार को पत्रकार वार्ता आयोजित कर नगर पालिका के पूर्व जल सभापति पार्षद कांग्रेस नेता शमीम अहमद ने नगर पालिका परिषद पर पानी वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए है। जनहित का मुददा रखते हुए अहमद ने कहा कि कायरी फिल्टर प्लांट दो साल से रिपेयरिंग के अभाव में बंद पड़ा है बीते सालों से बिना फिल्टर किया हुआ गंदा पानी पार्वती नदी से सीधे नागरिकों तक सप्लाई किया जा रहा है। अहमद ने नगर पालिका परिषद की दुषित पानी वितरण कार्यशैली और इंदौर जैसे घटना से नागरिकों को बचाने के लिए जिला प्रशासन से शहर की जल प्रदाय व्यवस्था अपने हाथ में लेने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने की दशा में शमीम अहमद ने अमरण अनशन पर बैठने की चैतावनी भी दी है।


एपेंडिक्स कैंसर जैसी भयानक बीमारियों में इजाफा

भयवाह स्थिति को रखते हुए शमीम अहमद ने बताया कि सीहोर में अधिकतर पार्वती नदी कायरी डेम और भगवानपुरा व जमोनिया डेम से जल प्रदाय किया जाता है। जहाँ का फिल्टर प्लांट लगभग दो वर्ष से रिपेयरिंग के अभाव में बंद पड़ा हुआ है। एलम से पानी को साफ  किया जाता है वहीं ब्लिचिंग पाउडर से नदी के पानी में मौजूद जीवाणुओं को नष्ट किया जाता है। एलम ब्लिचिंग पाउडर अथवा ब्लिचिंग सिलेंडर का उपयोग भी कई महीनों से नहीं किया गया है। नदी का खतरनाक पानी सीधे नागरिकों तक पहुँचाया जा रहा है। इधर निरंतर गंदा पानी उपयोग करने से नागरिकों पर बीमारियां का खतरा बढ़ गया हैं, जिसमें उल्टी, दस्त से लगाकर एपेंडिक्स से लेकर कैंसर जैसी भयानक बीमारियों में इजाफा हुआ है,नागरिक वास्तविक स्थिति से अंजान है। वर्तमान में सीहोर नगर पालिका परिषद द्वारा शुद्ध व साफ़-सुथरा पानी देने की बजाय स्लो पायजन बांट रही है।


लिकेजों को सुधारने में नगर पालिका सक्षम नहीं

शहर में पानी की सप्लाई पाइप लाइन सन 1980 की बिछी हुई है, जिसकी कैपेसिटी सिर्फ  35 वर्ष थी लेकिन लगभग 50 वर्ष उस पाईप लाइन को हो गये हैं। इस कारण लाइन में लिकेज हो जाते हैं लिकेजों को सुधारने में नगर पालिका सक्षम नहीं है और न सुधारें जा रहे हैं। लिकेजों के माध्यम से नालियों का गंदा पानी सप्लाई पाइप लाइन में चला जाता है। नालियों का गंदगी युक्त पानी नागरिकों तक पहुँच रहा है। उन्होने कहा कि शहर में बनी पानी की टंकियां पाचास साल पुरानी हो गई है। स्वयं नगर पालिका द्वारा वर्ष 2022 में एमआरएसटीसी भोपाल से जांच की गई थी। जिस में उक्त टंकियां उपयोग में आने लायक नहीं पाई गई थी। शहर की समस्त जल प्रदाय व्यवस्था सन 1995 में पीएचई विभाग द्वारा सीहोर नगर पालिका को ट्रांसफर की गई थी।


पांच के स्थान पर एक सब इंजीनियर संभाल रहा व्यवस्था

उक्त व्यवस्था के साथ 5 सब इंजीनियर और लगभग 150 कर्मचारियों को उक्त जल प्रदाय व्यवस्था को संचालित करने के लिए रखा गया था। जिनकी तनख्वाह भी पीएचई विभाग के द्वारा दी जाती है। साथ ही शासन द्वारा उक्त व्यवस्था के लिये राशि अलग से दी जाती रही है। सब इंजीनियर समस्त जल प्रदाय व्यवस्था देखते थे और व्यवस्था सुचारू रूप से चलती थी। उक्त सब इंजीनियरों का ट्रांसफर हो गया या रिटायर हो गये है। वर्तमान में नगर पालिका में बाहर से आये केवल एक मात्र सब इंजीनियर समस्त जल प्रदाय व्यवस्था देख रहे है, जो हास्यास्पद है। शमीम अहमद ने जिला प्रशासन से तत्काल सीहोर नगर की जल प्रदाय व्यवस्था अपने हाथ में लेने और बंद पड़े फिल्टर प्लांट चालू कराने व नगर में जल प्रदाय पाइप लाइनों में हो रहे समस्त लिकेजों को ठीक कराने और एलम व ब्लिचिंग पाउडर का उपयोग पर्याप्त मात्रा में होना सुनिश्चित करने, पानी की टंकियों में क्षमता अनुसार पानी भरने सहित नागरिकों को महामारी से बचाने की मांग की है।

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