सीहोर : एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने दी शिवशक्ति महायज्ञ में आहुतियां - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

सीहोर : एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने दी शिवशक्ति महायज्ञ में आहुतियां

  • आज किया जाएगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में देवता पूजन, हवन, महाभिषेक का दिव्य अनुष्ठान

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सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम शाहपुर कौड़िया में भव्य कलश यात्रा के साथ पंच दिवसीय एक कुण्डीय शिव शक्ति यज्ञ एवं ऋणमुक्तेश्वर महादेव प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को विजया एकादशी पर फलहारी प्रसादी का यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को वितरण किया गया। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पर जारी हवन में आहुतियां दी। महोत्सव के अंतर्गत यज्ञाचार्य पंडित राहुल पाठक के मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने 1803 हवन में वेद मंत्रों के साथ आहुतियां दी जा रही है। आगामी दिनों में यहां पर भव्य रूप से मंदिर में प्राण-प्रतिष्ष्ठा समारोह पूर्ण विधि-विधान से पूर्ण किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पंडित धर्मेन्द्र व्यास ने बताया कि महाशिवरात्रि को देवता, पूजन, प्राण प्रतिष्ठा के साथ महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। शिव मंदिर के लिए उज्जैन से ज्योत लेकर आए थे और उसके पश्चात कलश यात्रा के साथ अनुष्ठान का श्रीगणेश किया गया। उन्होंने बताया कि यज्ञ की परिक्रमा का काफी महत्व है। यहां पर बनाई गई। यज्ञशाला में यज्ञ में बैठने वालों के अलावा आस-पास के ग्रामीण आस्था और उत्साह के साथ परिक्रमा कर रहे है। यज्ञ की परिक्रमा प्रदक्षिणा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो जीवन को निरोगी बनाने और नकारात्मकता को समाप्त करने में सहायक है। मान्यता है कि यज्ञ कुंड की दक्षिणवर्ती परिक्रमा से पुण्य की प्राप्ति होती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और यह मानसिक शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। मान्यता है कि यज्ञशाला की परिक्रमा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यज्ञ मंडप की परिक्रमा से न केवल पुण्य प्राप्त होता है, बल्कि ऐसा माना जाता है कि इसमें हर पग बढ़ाने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। मानसिक और शारीरिक ऊजा:र् यज्ञ के दौरान उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा और औषधीय धुएं के आसपास घूमने से परिक्रमा करने वाले को मानसिक शांति, तनाव से मुक्ति और शारीरिक मजबूती मिलती है। मनोरथों की पूर्ति श्रद्धालु श्रद्धा एवं विश्वास के साथ यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते हैं, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के दुख-दरिद्र दूर होते हैं। 108 परिक्रमा का विधान: कुछ परंपराओं में 108 परिक्रमा (या 3, 7, 11) लगाने का विशेष महत्व है, जो 27 नक्षत्रों और उनसे जुड़ी बाधाओं को शांत करने के लिए मानी जाती है।

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