- 18 मार्च को पटना में बड़ी गोलबंदी, समता अधिकार रैली का होगा आयोजन
दिल्ली विश्विद्यालय की चर्चित छात्रा नेत्री अंजली ने कहा कि सामाजिक न्याय के सवाल पर एक वर्ग की छटपटाहट को उसके ऐतिहासिक संदर्भ में समझना होगा. उन्होंने कहा कि सदियों से श्रम और शोषण का बोझ एक समुदाय पर डाला गया, जबकि लाभ दूसरे उठाते रहे. उन्होंने कहा कि भूमिहीन, दलित और वंचित तबकों की स्थिति आज भी गंभीर है. जेएनयू की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दबे-कुचले समुदायों को ही उल्टा कटघरे में खड़ा किया जाता है. उन्होंने कहा कि आंदोलन को और तेज कीजिए ताकि कोई और रोहित, कोई और पायल इस व्यवस्था का शिकार न बने. मनजीत साहू ने कहा कि बिहार में समता आंदोलन परवान चढ़ रहा है और 18 मार्च के कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की जिम्मेदारी हम सबके कंधो पर है. पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा ने निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने, 65 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने और ईडब्ल्यूएस प्रावधान खत्म करने की मांग की. इसके पूर्व जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष धनंजय ने कन्वेंशन में प्रस्ताव को प्रस्तुत किया और बिहार में यूजीसी के समर्थन में चले आंदोलनों की एक रिपोर्ट रखी. सर्वसम्मति से 18 मार्च को समता अधिकार न्याय रैली को ऐतिहासिक बनाने का प्रस्ताव उन्होंने पेश किया जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया. सभा का संचालन करते हुए रिंकू यादव ने कहा कि लड़ाई सदियों पुराने विशेषाधिकार को तोड़ने की है. जीवन के हर क्षेत्र में बराबरी जरूरी है और बिहार को सामाजिक न्याय की अग्रिम चैकी के रूप में फिर खड़ा होना होगा.
राज्यस्तरीय समता कन्वेंशन के मुख्य प्रस्ताव
1.शिक्षा संस्थानों में बढ़ते जातीय भेदभाव, उत्पीड़न और असमानता बेहद गंभीर है. हाल में जेएनयू की वाइस चांसलर द्वारा एक पॉडकास्ट में दलित उत्पीड़न का मजाक उड़ाने और यूजीसी गाइडलाइन को अनावश्यक व अतार्किक बताने जैसी टिप्पणियां निंदनीय है. इसी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय में गाइडलाइन के समर्थन में आंदोलनरत छात्रों पर हमले और प्रशासन की मौजूदगी में अपमान की घटनाएँ लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात हैं और यह भी बेहद निंदनीय है.
2. यूजीसी 2026 नोटिफिकेशन को संसद द्वारा कानून बनाया जाए, संस्थागत जातिवाद को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए
3. राष्ट्रीय समता आयोग का गठन संवैधानिक दर्जा और स्वतंत्र जांच शक्तियाँ हों. वहाँ अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद को पेश करें.
4. बिहार में जातीय सर्वेक्षण के बाद 65 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए.
5. जजों की नियुक्ति में कॉलेजियम सिस्टम खघ्त्म करके बेहतर लोकतांत्रिक व्यवस्था न्यायालय में सुनिश्चित किया जाए. निजी क्षेत्रों में भी रिजर्वेशन को लागू किया जाए, जाति गणना करवाई जाए.
6. नई शिक्षा नीति 2020 राष्ट्रीय शिक्षा नीति और वापस लिया जाए.
7. 18 मार्च 2026 को पटना में समता अधिकार न्याय सम्मेलन को सफल बनाया जाए.

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