उन्होंने कहाकि हवन और यज्ञ प्राचीन दिव्य अनुष्ठान है। हवन यज्ञ का छोटा रूप है। किसी भी पूजा अथवा जप आदि के बाद अग्नि में दी जाने वाली आहुति की प्रक्रिया हवन के रूप में प्रचलित है। यज्ञ किसी खास उद्देश्य से देवता विशेष को दी जाने वाली आहुति है। इसमें देवता, आहुति, वेद मंत्र, ऋत्विक, दक्षिणा अनिवार्य रूप से होते हैं। हवन हिंदू धर्म में शुद्धीकरण का एक कर्मकांड है। कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता के निकट हवि पहुंचाने की प्रक्रिया को हवन कहते हैं। हवि, हव्य अथवा हविष्य वह पदार्थ है, जिनकी अग्नि में आहुति दी जाती हैं। हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करने के बाद इस पवित्र अग्नि में फल, शहद, घी, काष्ठ (लकड़ी) आदि पदार्थों की आहुति प्रमुख होती है। ऐसा माना जाता है कि यदि आपके आस-पास किसी बुरी आत्मा इत्यादि का प्रभाव है तो हवन प्रक्रिया इससे आपको मुक्ति दिलाती है। शुभकामना, स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए भी हवन किया जाता है।
सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम शाहपुर कौड़िया में पंच दिवसीय एक कुण्डीय शिव शक्ति यज्ञ एवं ऋणमुक्तेश्वर महादेव प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पर जारी हवन में आहुतियां दी। महोत्सव के अंतर्गत यज्ञाचार्य पंडित राहुल पाठक के मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने 1803 हवन में वेद मंत्रों के साथ आहुतियां दी जा रही है। आगामी दिनों में यहां पर भव्य रूप से मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पूर्ण विधि-विधान से पूर्ण किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पंडित धर्मेन्द्र व्यास ने बताया कि महाशिवरात्रि को देवता, पूजन, प्राण प्रतिष्ठा के साथ महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने बताया कि शाहपुर कौड़िया में जारी यज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे है और यहां पर मौजूद यजमानों के द्वारा आहुतियां देने का क्रम जारी है। रविवार को प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत महाप्रसादी और पूर्णाहुतियां दी जाएगी।
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