पटना : समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधीकरण पर दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 15 फ़रवरी 2026

पटना : समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधीकरण पर दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन

Aggriculture-workshop-patna
पटना (रजनीश के झा)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर (ICAR-RCER), पटना एवं राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के संयुक्त तत्वावधान में लघु एवं सीमांत कृषक कार्यशाला – सह – मात्स्यिकी, यांत्रिकी, बागवानी एवं पशु मेला अन्तर्गत “समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधीकरण” विषय पर दिनांक 14–15 फरवरी 2026 को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र, पिपराकोठी में किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्वी चंपारण जिले के लगभग 4000 किसानों ने सहभागिता की, जिनमें अनुसूचित जाति के करीब 250 किसान शामिल थे। कार्यशाला का शुभारम्भ बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने किया और उन्होंने किसानों से नई-नई कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि प्रणालियों से अवगत कराते हुए उनकी आय में वृद्धि करना तथा बदलते जलवायु परिदृश्य में खेती को अधिक सुरक्षित, स्थायी और लाभकारी बनाना है। समापन समारोह (15 फरवरी 2026)  के मुख्य अतिथि माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर रहे। उन्होंने कृषि संस्थानों द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कृषि के क्षेत्र में नवाचार अपनाने से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।


Aggriculture-workshop-patna
कार्यशाला का आयोजन पूर्वी चंपारण के सांसद माननीय श्री राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधीकरण को अपनाना समय की आवश्यकता है, जिसके माध्यम से पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन एवं जैविक खाद निर्माण जैसे विभिन्न घटकों को एक साथ जोड़कर किसान अपनी आय को स्थायी एवं सुदृढ़ बना सकते हैं। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्यावहारिक मार्गदर्शन ने किसानों में यह विश्वास उत्पन्न किया कि बदलते जलवायु परिदृश्य एवं बाजार की अनिश्चितताओं के बीच भी वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से खेती को सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सकता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा किसानों के बीच पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर मशीन, फावड़ा एवं वर्मी बेड जैसे कृषि आदानों का वितरण किया गया, जिससे फसल संरक्षण, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कार्यशाला के आयोजन सचिव एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि समेकित कृषि प्रणाली छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आय संवर्धन एवं संसाधनों के समुचित उपयोग का एक प्रभावी मॉडल है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए फसल विविधीकरण को आवश्यक बताते हुए किसानों को खरीफ एवं रबी फसलों के साथ दलहन, तिलहन, सब्जी एवं चारा फसलों को अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन में स्थिरता सुनिश्चित हो। कार्यशाला में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी. एस. पाण्डेय भी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान तकनीकी सत्रों के माध्यम से किसानों को समेकित कृषि प्रणाली, फसल विविधीकरण एवं आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग संबंधी विस्तृत जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।

कोई टिप्पणी नहीं: