पटना : बिहार बजट 2026-27 : जनता के साथ छल, आंकड़ों की बाजीगरी : भाकपा-माले - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

पटना : बिहार बजट 2026-27 : जनता के साथ छल, आंकड़ों की बाजीगरी : भाकपा-माले

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पटना (रजनीश के झा)। भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने बिहार सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को जनविरोधी, दिशाहीन और पूरी तरह आंकड़ों की बाजीगरी पर आधारित बजट करार दिया है. पार्टी का कहना है कि यह बजट बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा-स्वास्थ्य की बदहाली, किसानों की तबाही और महिलाओं-बेटियों पर बढ़ती हिंसा जैसे ज्वलंत सवालों से मुंह मोड़ने वाला बजट है. सरकार ने एक बार फिर गरीबों, मजदूरों, किसानों, छात्रों और महिलाओं की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज करते हुए बड़े-बड़े दावों और खोखली घोषणाओं का पुलिंदा पेश किया है. बजट में न तो स्थायी रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना है, न ही सरकारी रिक्त पदों को भरने का कोई रोडमैप.


शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में वास्तविक निवेश के बजाय बजट में निजीकरण को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति साफ दिखाई देती है. सरकारी स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल विश्वविद्यालय और अस्पताल लगातार संसाधन-विहीन होते जा रहे हैं, लेकिन बजट में इनके लिए कोई निर्णायक हस्तक्षेप नहीं किया गया है. भाकपा-माले ने सवाल उठाया कि जब बिहार की बेटियाँ असुरक्षित हैं, छात्राएँ आत्महत्या को मजबूर हो रही हैं और यौन हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही हैं, तब बजट में महिला सुरक्षा, छात्रावास, काउंसलिंग और सामाजिक न्याय के लिए कोई प्रभावी प्रावधान क्यों नहीं है? 


किसानों के संदर्भ में पार्टी ने कहा कि सरकार कृषि संकट, बढ़ती लागत, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सिंचाई जैसे बुनियादी सवालों पर पूरी तरह विफल रही है. किसानों को राहत देने के नाम पर बजट में पुरानी घोषणाओं की पुनरावृत्ति के अलावा कुछ भी नहीं है. भाकपा-माले ने यह भी आरोप लगाया कि बजट में बुलडोजर राज, विस्थापन और भूमि-हीनता के सवालों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है, जबकि हजारों गरीब परिवार उजाड़े जा रहे हैं. पार्टी ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, सत्ता बचाने का बजट है. भाकपा-माले जनता के सवालों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष तेज करेगी और इस जनविरोधी बजट के खिलाफ व्यापक आंदोलन खड़ा करेगी.

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