प्रशिक्षण के दौरान डॉ. पवनजीत ने जीरो-टिल तकनीक के माध्यम से मूंग की खेती, कम लागत में अधिक उत्पादन तथा प्रभावी जल संरक्षण उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह तकनीक समय, श्रम और संसाधनों की बचत करते हुए बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करती है। इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. आरती कुमारी ने कहा कि जीरो-टिल पद्धति अपनाने से न केवल खेती की लागत घटती है, बल्कि मिट्टी की संरचना एवं उर्वरता भी बेहतर बनी रहती है। उन्होंने उन्नत जल प्रबंधन तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन विधियों के उपयोग से कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को खेत में ही प्रायोगिक प्रदर्शन के माध्यम से विभिन्न तकनीकों का अवलोकन कराया गया। इस दौरान जल दक्ष सिंचाई विधियाँ, फसल प्रबंधन उपायों तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा जीरो-टिल गेहूं एवं जीरो-टिल मूंग के खेतों का निरीक्षण भी किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के 80 किसानों, जिनमें 25 महिला किसान भी शामिल थीं, ने भाग लिया। किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। साथ ही किसानों के बीच भिंडी एवं तोरई के बीजों का वितरण भी किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. अनुप दास (निदेशक) एवं डॉ. अभय कुमार (प्रधान वैज्ञानिक) के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
पटना (रजनीश के झा), 24 मार्च। प्रखंड के ग्राम पचलखा में 24 मार्च 2026 को जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत जीरो-टिल मूंग में कुशल जल प्रबंधन एवं जल दक्ष कृषि विधियों पर आधारित प्रक्षेत्र दिवस सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक एवं जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि बदलते मौसम के दुष्प्रभाव को कम करते हुए उत्पादन एवं आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें