इस संबंध में जानकारी देते हुए परमार समाज के पूर्व चल समारोह के अध्यक्ष सुरेश परमार गब्बर ने बताया कि यज्ञ संरक्षक पंडित श्री कटारे के मार्गदर्शन में ग्राम मऊआखेड़ी में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा कुलांश और रामाखेड़ी आदि में यज्ञ और दिव्य अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। पंडित श्री कटारे ने बताया कि हमारे ब्रह्मलीन पिता श्री द्वारा करीब 232 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है और हमारे द्वारा भी अब तक 88 से अधिक मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है और करीब 12 मंदिर निर्माणाधीन है। यज्ञ करने वाले की सब मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वेद में आया है अग्नि का आधान करो, उसमें आहुति दो, निश्चित ही मनोकामनाएं पूर्ण होंगी लेकिन उसके लिए पृथ्वी जैसा सहनशील और सूर्य की तरह तेजस्वी बनना होगा। हवन यज्ञ की आंशिक विद्या है जबकि यज्ञ मनुष्य जीवन का संपूर्ण विधान है। मात्र अग्नि होम करने वाले को यज्ञ से प्राप्त होने वाले लाभ नहीं मिल सकते हैं। यज्ञमय जीवन मार्ग को अपनाने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यज्ञ परमात्मा की प्राप्ति, मोक्ष व आनंद प्रदान करता है। यज्ञ से सभी रोगों से मुक्ति के अलावा पर्यावरण के साथ-साथ आत्मा की शुद्धि, विद्या, ज्ञान प्राप्त किए जा सकते हैं
सीहोर। यज्ञ-हवन को सनातन धर्म में समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति और दैवीय कृपा प्राप्त करने का सर्वोच्च साधन माना गया है। वैदिक मंत्रों और औषधियों की आहुति से वातावरण शुद्ध होता है, जिससे मानसिक शांति, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम मऊआखेडी तकीपुर में सोमवार को आगामी दिनों में होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत सात दिवसीय महायज्ञ के भूमि पूजन और ध्वजारोहण श्री-श्री 108 पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने कहे। इस मौके पर ग्राम मऊआखेड़ी कुलांश और रामाखेड़ी आदि में पंडित श्री कटारे का स्वागत किया गया।

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